तस्वीरों में-  कुपोषण से ख़तरे में बचपन
कुपोषण से ख़तरे में बचपन
 
स्थानीय महिलाएँ ही किसी सरकारी पहल को सफल बना सकती हैं क्योंकि वो अपने इलाक़े के चप्पे चप्पे से वाकिफ हैं. वे जानती हैं कि किस घर में क्या समस्या है, कौन गर्भवती महिला है, जिसे मदद की ज़रुरत है...किस शिशु की क्या ज़रुरत है और इलाज के बाद कौन सा बच्चा फिर बीमार हो रहा है. ये गाँव का नक्शा बनाकर नियमित रुप से हर घर पर नज़र रखतीं हैं.
 
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