कला जगत-2008
 
गीत-संगीत
 

गीत-संगीत
(बाएं से दाएं)भीमसेन जोशी, ममा अफ्रीका, रिचर्ड राइट्स, वाइनहाउस, बॉब डायलन, शरन रानी, एआर रहमान, किशन महाराज
 

गीत-संगीत

 

पहले बात भारतीय संगीत जगत की.

मशहूर तबला वादक पंडित किशन महाराज का मई महीने की शुरुआत में 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वर्ष 2002 में पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित किशन महाराज के जाने से तबला वादन के क्षेत्र में एक विशिष्ट कलाकार और भारतीय शास्त्रीय संगीत के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया.

इसके अलावा सरोद वादक शरन रानी भी दुनिया को अलविदा कह गईं. सरोद जैसे मर्दाने साज़ को बजाने वाली वो पहली महिला थीं जिसके कारण उनके प्रशंसक उन्हें ‘सरोद रानी’ के नाम से पुकारते थे. उनका देहांत उनके 80वें जन्मदिन से एक दिन पहले हो गया.

इसके अलावा दक्षिण भारत के महान संगीतकारों में से एक, वायलिन वादक कुन्नाकुडी वैद्यनाथन और हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध गायक महेंद्र कपूर भी दुनिया को अलविदा कह गए.

पर सुरों के बेताज बादशाह पंडित भीमसेन जोशी को भारत सरकार ने भारत रत्न जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा करके भारतीय शास्त्रीय संगीत के महत्व और इस क्षेत्र में भीमसेन जोशी के काम की महत्ता को स्वीकार किया है. भारत के युवा संगीतकार एआर रहमान भी विश्वस्तरीय प्रतिष्ठित गोल्डन ग्लोब अवार्ड के लिए नामांकित हुए.

विश्व संगीत


कुन्नाकुडी वैद्यनाथन
वैद्यनाथन देश-विदेश में अपने वायलिन वादन के लिए जाने जाते थे
पश्चिम में संगीत के प्रतिष्ठित ग्रैमी अवार्ड में इस बार डंका बजा एमी वाइनहाउस का. उनको पाँच ग्रैमी पुरस्कार मिले. वहीं अमरीका के मशहूर गायक बॉब डायलन को पुलित्ज़र सम्मान से नवाज़ा गया. डायलन अपने गीतों और उनमें निहित राजनीतिक-सामाजिक चेतना के लिए जाने जाते हैं.

युवाओं के बीच दुनियाभर में सर्वाधिक ख़्याति पाने वाले बैंडों में से एक है पिंक फ़्लॉयड बैंड. यह बैंड अब सक्रिय नहीं है पर इसके गीत आज भी युवाओं और पिछली कुछ पीढ़ियों के लोगों के बीच ख़ासे लोकप्रिय रहे हैं.

इस बैंड के एक सदस्य, रिचर्ड राइट्स का इस वर्ष निधन हो गया. शाइन ऑन यू क्रेज़ी डायमंड और ड्रार्क साइड ऑफ़ मून जैसी प्रस्तुतियों के लिए गीतकार और गायक राइट्स हमेशा याद आएंगे.

पूरे दक्षिण अफ्रीका और दुनियाभर में 'ममा अफ्रीका' के नाम से विख्यात रहीं अफ्रीकी गायिका मिरियम मकेबा का इस वर्ष निधन हो गया. वो इस वर्ष दक्षिणी इटली में एक कार्यक्रम प्रस्तुत कर रही थीं जब उनको हार्टअटैक पड़ा और उनका निधन हो गया.

मकेबा अपने संगीत ही नहीं, रंगभेद विरोधी अभियान में सक्रियता से जुड़े रहने के कारण भी चर्चित रहीं.
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