कला जगत-2008
 
विश्व साहित्य
 

आरोह और अवरोह
(क्लॉक वाइज़) अहमद फ़राज़, नित्सिन, लेक्लेज़ियो, सलमान रूश्दी, अरविंद अडिगा, ऑर्थर क्लार्क, टर्केल
 

आरोह और अवरोह

 

पहले बात उनकी जो सम्मानित हुए, जिनके काम को सराहा गया और उन्हें मान्यता मिली.

इस बार साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है फ्रांसिसी भाषा के लेखक, उपन्यासकार ज़्याँ मेरी गुस्ताव लेक्लेज़ियो को. एक उपन्यासकार के रूप में लेक्लेज़ियो उस समय चर्चा में आए, जब वर्ष 1980 में उनका उपन्यास डेज़र्ट आया. अपने लेखन के लिए लेक्लेज़ियो को फ़्रांस में कई सम्मान मिल चुके हैं. इनमें 1972 में मिला प्री लरबॉ और 1997 में मिला ग्रा प्रीं ज्याँ जियोनो शामिल हैं.

रिपोर्ट पढ़ें- लेक्लेज़ियो को साहित्य का नोबेल

बात करें बुकर की तो भारत के लिए यह ख़ासा उत्साहित करने वाला वर्ष रहा. भारतीय लेखक अरविंद अडिगा को इस वर्ष पुरुष वर्ग का बुकर पुरस्कार मिला.

बुकर पुरस्कारों की शार्ट लिस्ट में छह लेखक थे जिसमें अडिगा के अलावा भारतीय मूल के अमिताभ घोष, सेबास्टियन बैरी, स्टीव टोल्ट्ज, लिंडा ग्रांट और फिलिप हेनशर थे. इन लेखकों में 34 वर्ष के अडिगा सबसे कम उम्र के थे. उनका उपन्यास व्हाइट टाइगर वर्तमान भारत की कहानी कहता है.

रिपोर्ट पढ़े- बुकर अरविंद अडिगा को

पिछले वर्ष नाइटहुड पुरस्कार के लिए जब सलमान रुश्दी का नाम घोषित हुआ था तो दुनियाभर में कुछ मुस्लिम संगठनों ने इसकी आलोचना की थी. इस वर्ष साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए सलमान रुश्दी ने जून महीने में यह सम्मान स्वीकार किया.

अब के हम बिछड़े तो...

अहमद फ़राज़

'अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
......
तू ख़ुदा है न मेरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा
दोनों इंसाँ हैं तो क्यों इतने हिजाबों में मिलें
.....
अब न वो मैं हूँ न तु है न वो माज़ी है "फ़राज़"
जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें'
-अहमद फ़राज़

दक्षिण एशिया के मशहूर साहित्यकार, पाकिस्तान के उर्दू शायर अहमद फ़राज़ की विदाई हिंदी और उर्दू जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है. उधर रूस के महान साहित्यकार सोल्जे नित्सिन का भी दुनिया को अलविदा कह देना साहित्य जगत के लिए एक बड़ा नुकसान था.

विज्ञान में लेखन और उसकी चर्चा कम ही होती है पर श्रीलंका में रहकर विज्ञान कथाओं की 100 से ज़्यादा किताबें लिख चुके ऑर्थर सी क्लार्क का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया. ब्रितानी मूल के इस लेखक ने विज्ञान को लेखन का विषय बनाया और श्रीलंका को अपनी साहित्य साधना की कर्मभूमि.

पुलित्ज़र पुरस्कार से सम्मानित हो चुके वरिष्ठ लेखक स्टूड्स टर्केल का भी इस वर्ष निधन हो गया. अमरीकी लेखक टर्केल केवल साहित्यकार ही नहीं, इतिहासकार और प्रसारक भी थे. उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में भी योगदान दिया था.
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