बीबीसी पत्रकारिता की पाठशाला
 
अनुवाद
 



अनुवाद

 

एक भाषा से दूसरी भाषा में अच्छा अनुवाद तभी संभव है जब मूल पाठ की आत्मा को समझा जाए.

बीबीसी हिंदी में वैसे तो अब भारत, पाकिस्तान और अन्य दक्षिण एशियाई देशों से ज़्यादातर हिंदी में ही रिपोर्टिंग होती है लेकिन फिर भी विश्व की अन्य घटनाओं की रिपोर्टें अँग्रेज़ी में ही आती हैं क्योंकि हर देश में हिंदी जानने वाले संवाददाता नहीं हैं.

ज़ाहिर है, वहाँ अनुवाद की ज़रूरत होती है. अच्छा और सरल अनुवाद तभी हो सकता है जब आप अँग्रेज़ी पाठ को दो-तीन बार पढ़कर अच्छी तरह समझ लें. उसके बाद उसे हिंदी में लिखें.

(इंटरनेट के लिए लिखते समय शब्दशः अनुवाद का ख़तरा बना रहता है. ‘ये पहली बार नहीं है कि...’, ‘सरकार ने ये क़दम ऐसे समय में उठाया है...’, ‘कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बंगलौर से आते हैं...’ ऐसे वाक्य सीधे सीधे अँग्रेज़ी का शब्दशः अनुवाद हैं.)

कुछ अँगरेज़ी के शब्द जितने जटिल होते हैं, उनके हिंदी अनुवाद भी उतने ही जटिल होते हैं. जैसे- विसैन्यीकरण, निरस्त्रीकरण, वैश्वीकरण, सामान्यीकरण, युद्धक हैलीकॉप्टर, मरीन सैनिक.

•अनुवाद को लेकर पहला सिद्धांत ये है कि अनुवाद, अनुवाद न लगे.
•दूसरा, जो लिखा है, वह पहले लिखने वाले की समझ में आना चाहिए.
•तीसरी महत्वपूर्ण बात यह कि मक्खी पर मक्खी न बैठाई जाए क्योंकि अँगरेज़ी और हिंदी की प्रकृति में फ़र्क है.
•और चौथा सिद्धांत यह है कि डिक्शनरी से कोई भारी-भरकम शब्द खोजने के बजाय आम भाषा में बात समझाई जाए.
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