दुनिया भर में फैले भारतीय
 
 
 
 
 
 
 
एशिया
 
 
एशिया

एशिया

 

ब्रूनेई- 76000, मलेशिया- 16 लाख 70 हज़ार
बर्मा- लगभग 29 लाख, हॉन्गकॉन्ग- 50,000
फ़िलीपीन्स- 38,500, सिंगापुर- तीन लाख सात हज़ार
थाईलैंड- 85,000, मालदीव- पौने तीन लाख


मालदीव

 

मालदीव की कुल लगभग पौने तीन लाख की जनसंख्या में से लगभग नौ हज़ार प्रवासी भारतीय रहते हैं. इन लोगो में डॉक्टर, अध्यापक, इंजीनियर, अकाउंटेंट मैनेजर और कुछ अन्य पेशेवर लोग हैं. इनमें से भी कुछ तो भारत की ही मदद से चल रही परियोजनाओं में काम कर रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान

 

पिछली कुछ शताब्दियों में अफ़ग़ानिस्तान से लोग बाहर आए हैं और 1992 से देश में मुजाहिदीनों के आने के बाद से तो लोगों ने बड़े पैमाने पर देश छोड़ा.एक समय वर्ष 1990 में जहाँ 45,000 भारतीय अफ़ग़ानिस्तान में थे वहीं वो संख्या 1996 में गिरकर 1000 हो गई.

मध्य एशिया के अन्य देश

 

कज़ाख़स्तान, उज़्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिज़स्तान जैसे देशों में लगभग पौने तीन हज़ार भारतीय रहते हैं. इनमें मुख्य तौर पर प्रवासी भारतीय छात्र, व्यापारी, मैनेजर और बैंक या होटलों में काम करने वाले कर्मचारी हैं. अलमाटी में स्थित भारतीय संस्कृति संस्थान काफ़ी सक्रिय है. भारत से मध्य एशिया के देशों के नज़दीक़ी संबंध को देखते हुए इन देशों में भारतीय समुदाय बढ़ सकता है.

दक्षिण पूर्व एशिया

 

इन देशों पर भारतीय प्रभाव तो आज भी देखा जा सकता है. फिर वह चाहे भाषा हो, साहित्य, धर्म, दर्शन या कला ही क्यों न हो. चीन, बर्मा और दक्षिण पूर्व एशिया के अन्य देशों में ये सहज ही देखा जा सकता है.

व्यापारियों, पेशेवर लोगों और क्लर्कों के रूप में भारतीय इस क्षेत्र में गए.मलाया में इंडियन नेशनल आर्मी की ओर से लड़ने सैकड़ों लोग गए. फिर स्वतंत्रता के बाद भी लोग 1970 के दशक में नौकरी के लिए थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, ब्रूनेई और हॉन्गकॉन्ग जैसे देशों में गए. हॉन्गकॉन्ग से भारत के रिश्ते लगभग डेढ़ सौ साल पुराने हैं.
 
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