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![]() अफ़्रीका मॉरीशस- सात लाख, पूर्वी अफ़्रीका- दो लाख, दक्षिण अफ़्रीका- 10 लाख
भारतीय बड़ी संख्या में अफ़्रीकी देशों में रह रहे हैं और उसमें से भी दक्षिण अफ़्रीका में रहने वाले भारतीयों की संख्या काफ़ी है. भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद के विरुद्ध चलाए अभियान से वहाँ के लोग काफ़ी प्रभावित हुए. मॉरीशस दास प्रथा ख़त्म होने के बाद ही भारतीयों का मॉरीशस जाना शुरू हुआ. मॉरीशस ही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ भारतीय मूल के लोग बहुमत में हैं. वहाँ की 70 फ़ीसदी जनसंख्या भारतीय मूल की है. वहीं रीयूनियन की तीन फ़ीसदी आबादी भारतीय मूल की है. भारतीयों ने दक्षिण अफ़्रीका के संघर्ष में जो योगदान दिया लोगों ने उसे कुछ हद तक भुला दिया क्योंकि ऐसा माना जाने लगा कि भारतीय मूल के लोगों ने पहले आम चुनाव में गोरों की पार्टी का समर्थन किया था. इस तरह भारतीयों के सामने फिर से कुछ दिक़क़्तें आई हैं. अब भारतीयों के सामने चुनौती है कि इस सोच को बदला जाए. अन्य अफ़्रीकी देश अंगोला, सेनेगल, घाना, गैंबिया, नामीबिया, इथियोपिया, इरीट्रिया और सूडान जैसे देशों में भारतीयों की मौजूदगी नहीं के बराबर है. मगर कीनिया, युगांडा और तंज़ानिया के साथ ही ज़ांबिया और ज़िम्बाब्वे जैसे देशों में भारतीय उन्नीसवीं सदी में गए जब ब्रितानी औपनिवेशिक साम्राज्य अफ़्रीका तक फैला. फिर भारतीय लोग बोत्सवाना और नाईजीरिया जैसे धनी देशों की ओर भी गए. भारतीय श्रमिक मूल रूप में वहाँ रेलवे लाइन बिछाने गए थे जिससे वहाँ की वृहद् संपदा तक पहुँचा जा सके. इसके बाद वहाँ भारतीय धनी हुए और धीरे-धीरे राजनीतिक रूप से भी शक्तिशाली हो गए. ये क्रम सबसे पहले कीनिया और फिर युगांडा में हुआ. वर्ष 1914 में ईस्ट अफ़्रीकन इंडियन नेशनल कांग्रेस का गठन मोम्बासा में हुआ. इसके बाद 1972 में युगांडा के शासक ईदी अमीन ने एशियाई मूल के लोगों को देश से निकाल दिया. इस तरह 1960 की शुरुआत में भारतीय मूल के जहाँ लगभग साढ़े तीन लाख लोग पूर्वी अफ़्रीका में थे वो संख्या गिरकर लगभग दो लाख तक हो गई है. ज़ांबिया और ज़िम्बाब्वे की आज़ादी के बाद भी भारतीयों की हालत ठीक ही रही. मेडागास्कर में पिछले कुछ दशकों में भारतीयों की स्थिति में सुधार हुआ है. मोज़ांबिक़ में भी भारतीयों की स्थिति ख़ासी अच्छी है. दक्षिण अफ़्रीका दक्षिण अफ़्रीका में भारतीयों की संख्या लगभग दस लाख तक है. भारतीयों ने दक्षिण अफ़्रीका में 1653 से ही आना शुरू कर दिया था जब हॉलैंड और उसके आस-पास के देशों के व्यापारियों ने भारतीयों को दासों के रूप में बेचा. फिर भारतीय वहाँ श्रमिकों के रूप में गए और उनकी कड़ी मेहनत की बदौलत वहाँ की अर्थव्यवस्था मज़बूत हुई. इस तरह भारतीय भी कुछ हद तक धनी होते गए और व्यापार-वाणिज्य के क्षेत्रों में वे गोरों को चुनौती भी देने लगे. इसे देखते हुए वहाँ गोरों के पक्ष में प्रशासन ने कुछ नियम क़ानून बना दिए और भारतीयों की बढ़त रोकने की कोशिश की. मोहनदास करमचंद गाँधी जब 1893 में दक्षिण अफ़्रीका पहुँचे तब भारतीयों की समानता और सम्मान के लिए लड़ाई शुरू हुई. नटाल इंडियन कांग्रेस की 1894 में स्थापना हुई. इसके बाद श्रमिक, व्यापारी और पेशेवर लोग इससे जुड़े. गाँधी जी के संघर्ष के बाद वो तरीक़ा दक्षिण अफ़्रीका में कई पीढ़ियों तक रहा और धीरे-धीरे जाकर स्थिति सुधरी. |
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