दुनिया भर में फैले भारतीय
 
 
 
 
यूरोप
 
 
 
 
 
यूरोप

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मुख्यतः ब्रिटेन- 10 लाख

पश्चिमी यूरोप और ब्रिटेन की ओर अधिकतर लोग बीसवीं सदी में गए. इसके बाद सूरीनाम के भारतीय हॉलैंड की ओर गए. फिर मेडागास्कर और मॉरिशस के लोगों ने फ्रांस का रुख़ किया. इसी तरह मोज़ांबिक़ और अंगोला के लोग पुर्तगाल की ओर गए.

कड़े नियमों की वजह से भारतीयों का बाक़ी यूरोप में जाना उतना स्वतंत्रतापूर्वक नहीं हुआ जितना ब्रिटेन में. कुछ पश्चिमी यूरोपीय देशों ने 1950 और 1960 में आर्थिक विकास के बाद श्रमिकों की कमी को देखते हुए एशियाई मूल के लोगों के लिए आव्रजन नियमों में ढिलाई हुई. इसके बाद इस क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों की बढ़ती माँग को देखते हुए भी भारतीयों के लिए अवसर पैदा हुए हैं. कंप्यूटर विशेषज्ञों के साथ ही, इंजीनियर, नर्सें, मैनेजर स्तर के लोग, अध्यापक और वैज्ञानिक बड़े पैमाने पर इन देशों में आए हैं.

पूर्वी और मध्य यूरोप में भारतीय लोगों की संख्या कुछ हद तक सीमित ही है और जो हैं उसमें मुख्य रूप से छात्र, व्यापारी और पेशेवर लोग ही हैं.

ब्रिटेन

 

आज की तारीख़ में यूरोपीय संघ के देशों में रहने वाले भारतीयों में से दो तिहाई लोग ब्रिटेन में रहते हैं. भारतीय समुदाय ब्रिटेन का एक सर्वाधिक शिक्षित और संपन्न समुदाय बन चुका है. भारतीयों ने व्यापार, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, मीडिया और मनोरंजन उद्योग में गहरी पैठ बना ली है.

भारतीय मूल के कई जाने-माने ब्रितानी उद्योगपति हैं जिनमें लक्ष्मी मित्तल, हिंदुजा बंधु और स्वराज पॉल जैसे लोग हैं. भारतीयों ने ब्रिटेन के राजनीतिक हल्कों में भी पकड़ बनाई है. हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में कई भारतीय हैं. भारतीयों ने कई सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संगठन खड़े किए हैं.
 
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