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![]() एशिया प्रशांत फ़िजी- तीन लाख 40 हज़ार, ऑस्ट्रेलिया- लगभग एक लाख 90 हज़ार
न्यूज़ीलैंड- 55,000, इंडोनेशिया- 55,000 इस क्षेत्र की प्रमुख बात ये है कि भारतीय समुदाय ने ख़ुद को यहाँ की परिस्थितियों के अनुकूल ढाल लिया है. प्रवासी भारतीय यहाँ पर स्थानीय क़ानूनों का सम्मान करने वाले, शिक्षित और ज़िम्मेदार हैं. यहाँ पर भारतीय लोग चार देशों में प्रमुखता से शामिल हैं. फ़िजी में अस्थिरता के बाद लोग ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की ओर बढ़ गए. इसके अलावा अफ़्रीका जैसे अन्य देशों से भी लोग इन देशों में आए हैं. कंप्यूटर और सॉफ़्टवेयर विशेषज्ञों के अलावा, इंजीनियर, डॉक्टर बड़ी संख्या में इन देशों में मौजूद हैं. ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों के भारत में परिवार से रिश्ते बने हैं और वे अक़सर भारत आते जाते रहते हैं. फ़िजी में रहने वाले लगभग साढ़े तीन लाख लोगों का इतिहास काफ़ी दुखद है. एक समय था जब वे श्रमिक के रूप में थे और उसके बाद स्वतंत्रता का समय आया तो भारतीयों की आर्थिक स्थिति सुधरी तब लोगों के दिलों में भारत विरोधी भावनाएँ पैदा हो गईं और भारतीयों को काफ़ी तक़लीफ़ें सहनी पड़ी. इसके बाद भी इस देश के प्रवासी भारतीयों को या भारतीय मूल के लोगों को काफ़ी परेशानियाँ हुईं मगर उनका भविष्य कुछ सुखद नहीं दिख रहा है और वे अब देश छोड़कर दूसरी जगहों पर जाने लगे हैं. |
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