मध्य पूर्व
 
 
 
 


 
मध्य पूर्व


मध्य पूर्व का मसला हर साल विश्व घटनाक्रम में प्रमुखता से उभरकर सामने आता है. पिछले कुछ महीनों से इस क्षेत्र से कम ही ख़बरें आ रही थीं लेकिन साल का अंत होते-होते मध्य पूर्व एक बार फिर सुर्ख़ियों में है.

जून 2008 में उस समय एक अहम घटना हुई जब मिस्र की मध्यस्थता के बाद इसराइल और चरमपंथी गुट हमास के बीच छह महीने के लिए संघर्षविराम की घोषणा की गई. लेकिन 19 दिसंबर को जैसे ही संघर्षविराम की अवधि समाप्त हुई, हमास ने कहा कि इसराइल ने संघर्षविराम का सम्मान नहीं किया है और ये सहमति अब समाप्त हो गई है.

21 दिसंबर को चरमपंथियों ने ग़ज़ा में रॉकेट भी दागे और इसराइली हवाई हमले में एक फ़लस्तीनी सैनिक की मौत हो गई.

इसके बाद इसराइल में प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव प्रचार में दोनों बड़े इसराइली नेताओं लिपी ज़िवनी और बिन्यामिन नेतन्याहू ने आगाह किया है कि अगर वे चुने गए तो ग़ज़ा में हमास को बाहर करेंगे. हालांकि इसराइली प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने इस तरह के बयानों से बचने के लिए कहा है.

संघर्षविराम के समय इसराइल को उम्मीद थी कि अपहृत इसराइली सैनिक गिलात शालित की रिहाई हो सकेगी जिसे चरमपंथियों ने दो साल पहले पकड़ लिया था जबकि हमास को आशा थी कि इस दौरान उसे ग़ज़ा में अपनी पकड़ मज़बूत करने का समय मिल जाएगा और साथ ही इसराइल-मिस्र की संयुक्त नाकेबंदी ख़त्म हो जाएगी. लेकिन कोई भी पक्ष अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया है.

संघर्षविराम की समाप्ति की घोषणा फ़लस्तीनियों और इसरालियों दोनों के लिए अहम समय पर आई है.
इसराइल में इस समय चुनाव प्रचार चल रहा है जबकि फ़लस्तीनी इलाक़ों में हमास और फ़तह के बीच प्रतिद्वंदिता बढ़ती जा रही है.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इसराइली-फ़लस्तीनी शांति वार्ता को बल देने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें अमरीका की मध्यस्थता में होने वाली बातचीत को अहम बताया गया है. पिछले पांच साल में सुरक्षा परिषद ने मध्य पूर्व पर पहली बार प्रस्ताव पारित किया है. इसे 14-0 से पारित किया गया और लिबिया ने हिस्सा नहीं लिया.

 
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