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![]() शाम के अंधेरे में नैटो के सैनिक अफ़गानिस्तान अफ़गानिस्तान-अफ़गानिस्तान में हालात पहले से ख़राब हुए और हाल में आई रिपोर्ट के अनुसार देश के तक़रीबन सत्तर प्रतिशत इलाक़ों में तालिबान का प्रभाव बढ़ गया है.
साल की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय सेनाओं की गतिविधियां बढ़ीं लेकिन जुलाई में काबुल में भारतीय दूतावास में धमाके हुए और उसके बाद परिस्थितियां बदतर होने लगीं. अगस्त महीने में दस फ्रांसीसी सैनिक मारे गए तो अमरीकी हमले में कई आम नागरिकों की मौत हो गई. अमरीकी सैनिकों की संख्या लगातार बढ़ी और नवनिर्वाचित अमरीकी राष्ट्रपति ने अफ़गानिस्तान को इराक़ से अधिक महत्वपूर्ण बताया. तालिबान का प्रभुत्व इतना बढ़ा कि राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने तालिबान के समक्ष वार्ता का प्रस्ताव रखा जिसे तालिबान ने यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि जबतक विदेशी सैनिक देश नहीं छोड़ते वो वार्ताएं नहीं करेंगे. प्रस्तुति एवं संकलन- सुशील झा |
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