| पखवाड़े के कलाकार : लाल रत्नाकर | |||
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वे कहते हैं कि उनके चित्रों का विषय वही होता है जो ज़मीन से जुड़ा हुआ हो. शायद इसीलिए वे अपने चित्रों को एक शीर्षक देते हैं - माटी के रंग. और उनके चित्रों में माटी के रंग दिखाई देते ही हैं माटी की ख़ुशबू भी निरंतर महसूस की जा सकती है. |
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