| पखवाड़े के कलाकार : लाल रत्नाकर | |||
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रत्नाकर का अपना बचपन और जीवन का बहुत सा हिस्सा गाँवों में ही गुज़रा है. शायद इसीलिए उनके किसी भी चित्र संयोजन में बनावटीपन या अधूरापन नहीं होता. उनके बनाए चित्रों में जीवन का हर पहलू परिलक्षित होता है और बखूबी उभरता है. |
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