| पखवाड़े के कलाकार : लाल रत्नाकर | |||
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जो गाँव नहीं जा पाते वे अक्सर गाँव को अपनी स्मृति में बसे चित्रों से याद करते हैं. और जब आपकी स्मृति ताज़ा होती है तो ठीक वैसी ही तस्वीरें उभरकर सामने आती हैं जैसी रत्नाकर अपने कैनवास पर उकेरते हैं. |
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