| पखवाड़े के कलाकार : लाल रत्नाकर | |||
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रत्नाकर के चित्र न किसी परिकथा का हिस्सा होते हैं न कोई कल्पना के चित्र. वे होते हैं ऐसे सहज और सरल चित्र जो अतिवास्तविक दृश्यों का विवरण देते हैं. इस विवरण में सामाजिक-राजनीतिक सच्चाई दिखाई देती है और वर्ण-जाति व्यवस्था की पीड़ा भी. |
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