| आम बजट: आम आदमी की उम्मीदें | |||
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विमल (धोबी) मुझे नहीं पता है कि बजट क्या होता है. हर साल बजट में सुनता हूँ कि फलां-फलां सामान सस्ता हुआ हैं लेकिन बाजार में ऐसा कुछ नहीं दिखता है. मैं तो कपड़े प्रेस करके अपनी रोजी-रोटी चलाता हूँ इसलिए मैं चाहता हूँ कि यह सलामत रहे. हां, कोयला के दाम घट जाएँ तो बड़ी राहत मिलेगी. |
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