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सपना पूरा हुआ हबीब का

हबीब मियाँ के घर में हज पर जाने की तैयारियाँ चल रही हैं और वह ख़ुद भी अपनी नई टोपी को पहनकर फूले नहीं समा रहे हैं.

हज करने का हबीब मियाँ का सपना क़रीब 125 साल की उम्र में पूरा हो रहा है.

जी हाँ, जयपुर के एक ग़रीब इलाक़े में रहने वाले हबीब मियाँ 1938 में रिटायर हुए थे. सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक़ वे 125 साल के हो चुके हैं.

लेकिन हबीब मियाँ का कहना है कि उनकी उम्र 132 साल हो चुकी है.

हज करना उनका आज भी एक ऐसा बड़ा सपना है जिसे इस उम्र में भी पूरा करने की ख़्वाहिश को वे दबा नहीं सके.

राजस्थान के बैंक अधिकारी हबीब मियाँ को अब भी हर महीने लगी बंधी क़रीब 1900 रूपए पेंशन देने उनके घर आते हैं लेकिन उसमें हज करने का सपना पूरा नहीं हो सकता है.

अब ब्रिटेन के एक व्यवसायी की बदौलत उनका यह सपना पूरा होने का आसार बने हैं.

लंदन के इस व्यवसायी ने बीबीसी ऑनलाइन पर हबीब मियाँ की कहानी पढ़कर उनके हज पर जाने का ख़र्च उठाने का फ़ैसला किया है.

30 वर्षीय लंदन के व्यवसायी ने हबीब मियाँ की यात्रा के लिए दो लाख 70 हज़ार रुपए भेजे हैं.

लेकिन आख़िर हबीब मियाँ को इस पवित्र यात्रा पर जाने के लिए कुछ ख़रीदारी भी तो करनी है, सो उन्होंने बैंक अधिकारियों से कुछ और रुपए माँगे हैं.

और इसके लिए उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा है कि वे उन्हें उनके खाते में से कुछ ज़्यादा रुपए दे.

संपर्क

कई साल से हबीब मियाँ को घर जाकर पेंशन दे रहे बैंक अधिकारी राजेश नागपाल ही लंदन के व्यवसायी से सीधे संपर्क में रहे हैं.

नागपाल के अनुसार, "लंदन के व्यवसायी और मेरे बीच ईमेल पर संपर्क रहता है. ईमेल के माध्यम से ही हमने यह तय किया कि हबीब मियाँ की हजयात्रा पर कितना ख़र्च आएगा."

उन्होंने बताया कि स्थानीय हज कमेटी से भी ख़र्च के बारे में संपर्क किया गया और फिर यह तय हुआ कि उन्हें क़रीब दो लाख 70 हज़ार रुपए की ज़रूरत होगी.

अपनी आँखों की रोशनी खो चुके हबीब मियाँ अपने दो पोतों महमूद और छुट्टन मियाँ और उनकी माँ के साथ हज पर जाएँगे.

हबीब मियाँ के परिवार में 32 लोग हैं और वे जयपुर के पास एक मुस्लिम आबादी वाले इलाक़े में रहते हैं.

इस इलाक़े में गंदगी का आलम ये है कि यहाँ हर तरफ कूड़ा-करकट और नालियों का गंदा पानी नज़र आता है.

सपना

ऐसे माहौल में रहने के आदी हो चुके हबीब मियाँ के परिवार के लिए यह एक बड़े सपने के पूरा होने जैसा है.

हबीब मियाँ का दिन लोगों के साथ गपशप में ही बीत जाता है.

एक छोटे से अंधेरे कमरे में हबीब मियाँ का दरबार लगता है जहाँ उनके पड़ोसी और बच्चे उनसे पुराने ज़माने की कहानियाँ बड़े चाव से सुनते हैं.

अपने ज़माने की मुश्किलों के बारे में बताते हुए हबीब मियाँ आज की संचार क्रांति का धन्यवाद भी करते हैं जिसकी बदौलत उन्हें ब्रिटेन मिस्टर ख़ान जैसे व्यक्ति से संपर्क का अवसर मिला.

हबीब मियाँ कहते हैं, "मुझे लगता है कि लंदन के व्यवसायी को अख़बार के माध्यम से हमारे बारे में जानकारी मिली जिसमें बीबीसी ने हमारी दशा और हमारी इच्छा के बारे में बताया था."

हज कमेटी ने उनकी यात्रा की पूरी व्यवस्था कर दी है. बस अब तो हबीब मियाँ को उस मौक़े का इंतज़ार है जब मक्का की पाक ज़मीन पर अपने क़दम रखेंगे.