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विदेशी नामों का तड़का, लोगों में गुस्सा भड़का

 मंगलवार, 18 सितंबर, 2012 को 13:08 IST तक के समाचार
नेपाली स्कूल

राजनीतिक दलों के छात्र संघों का कहना है कि स्कूल-कॉलेजों के विदेशी नामों से नेपाल की राष्ट्रीय पहचान को ख़तरा है.

नासा, व्हाइट हाउज़, टैक्सास, ऑक्सफ़ोर्ड, चैल्सी.....ये नाम सुनकर आपके दिमाग़ में पहली बात क्या आती है? ये तो तय है कि ऑक्सफ़ोर्ड के अलावा बाकी किसी नाम को आप किसी स्कूल या शैक्षिक संस्थान के साथ नहीं जोडेंगे.

लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि नेपाल में ये कई स्कूल और कॉलेजों के नाम हैं. राजधानी काठमांडू की सड़कों पर अगर आप निकल जाएं तो आपको इन विदेशी नामों वाले शैक्षिक संस्थानों के पोस्टर और बिलबोर्ड जगह-जगह लगे दिख जाएंगे.

और इसीलिए ये निजी स्कूल और कॉलेज नेपाली मीडिया में मज़ाक का विषय बन गए हैं.

'राष्ट्रीय पहचान को ख़तरा'

लेकिन अब राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संघ इन शैक्षिक संस्थानों को बंद करने की बात कर रहे हैं. छात्र संघ नेता इस मांग पर अड़े हुए हैं.

शरद रसाइली, सीपीएन-माओइस्ट पार्टी की छात्र इकाई, ऑल नेपाल नेशनल इंडिपेंडेंट स्टूडेंट्स यूनियन रिवोल्यूशनेरी, अनीसू-आर, के संयोजक हैं. वे कहते हैं, “हमारी चिंता ये है कि नेपाल के ज़्यादा-से-ज़्यादा शैक्षिक संस्थान विदेशी नाम अपना रहे हैं जिससे हमारी राष्ट्रीय पहचान को ख़तरा है.”

अनीसू-आर उन नौ विपक्षी दलों से जुड़े छात्र संघों में शामिल है जो नेपाली शैक्षिक संस्थानों के विदेशी नामों का विरोध कर रहे हैं. अनीसू-आर विदेशी नामों पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहा है और इसके सदस्यों ने कई निजी स्कूल और कॉलेजों में तोड़-फोड़ भी की.

"हमारी चिंता ये है कि नेपाल के ज़्यादा-से-ज़्यादा शैक्षिक संस्थान विदेशी नाम अपना रहे हैं जिससे हमारी राष्ट्रीय पहचान को ख़तरा है."

शरद रसाइला, छात्र नेता

विरोध के निशाने पर ज़्यादातर कॉलेज हैं लेकिन विदेशी नामों वाले निजी स्कूलों से भी कहा गया है कि वो अपने नाम बदले.

नेपाल के निजी और बोर्डिंग स्कूलों की संस्था, प्राइवेट एंड बोर्डिंग स्कूल्स ऑफ़ नेपाल (पाबसोन) के पूर्व अध्यक्ष और सलाहकार राजेश खड़का कहते हैं कि रातों-रात स्कूलों का नाम बदलना मुश्किल है.

वे कहते हैं, “इन स्कूलों ने इन्हीं नामों से पंजीकरण करवाया है और इनकी पहचान इन्हीं नामों से है. हमें ये बदलने के लिए समय चाहिए.”

नाम बदलने की मांग

हाल ही में सरकारी अधिकारियों और शैक्षिक संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद फ़िलहाल छात्र संघों के नेता शांत हैं.

राजधानी काठमांडू में जगह-जगह पर विदेशी नाम वाले निजी स्कूल-कॉलेज दिख जाएंगे.

शरद राइसिली के मुताबिक इसकी वजह ये है कि अधिकारी तीन महीने में सभी स्कूल और कॉलेजों के नाम बदलने के लिए राज़ी हो गए हैं.

शिक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जनार्दन नेपाल के मुताबिक सरकार ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए एक समिति बनाई है.

जनार्दन नेपाल ने बीबीसी को बताया, “हम इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं. जैसे ‘पवित्र उद्यान’ का मतलब ‘होली गार्डन’ या चंद्र ज्योति का मतलब मून लाइट है. अगर ऐसे नाम क़ानूनन ग़लत नहीं पाए जाते, तो ठीक है.”

उन्होंने आगे कहा, “जहां तक विदेशी नामों की बात है तो हम उससे कैसे निपटा जाए, इस बारे में हम अभी विचार कर रहे हैं. जब हम विदेशी नाम वाले स्कूलों और कॉलेजों को दोबारा नाम देने का तरीका तय कर लेंगे, तब इस बारे में आधिकारिक घोषणा हो जाएगी.”

( इस खबर के लिए शीर्षक पसंद किया गया है फेसबुक पर हमारे पाठक नवल जोशी का. हमने मांगे थे आपसे इस खबर के लिए शीर्षक )

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