बगराम जेल अफ़ग़ान अधिकारियों के हवाले

 सोमवार, 10 सितंबर, 2012 को 16:48 IST तक के समाचार
बगराम जेल (फाइल फोटो)

बगराम जेल पर अब भी विवाद बना हुआ है

अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना ने विवादास्पद बगराम जेल का नियंत्रण अफ़ग़ान अधिकारियों को सौंप दिया है. इस समय बगराम जेल में लगभग तीन हज़ार तालिबान लड़ाके क़ैद हैं.

एक सादे कार्यक्रम के बाद अफ़ग़ान अधिकारियों को जेल की ज़िम्मेदारी सौंप दी गई.

अफग़ानिस्तान में मौजूद नेटो सेना को 2014 तक अफ़ग़ानिस्तान छोड़ देना है और उसी के तहत यह भी तय किया गया था कि उससे पहले सभी क़ैदियों को अफ़ग़ान अधिकारियों के हवाले कर दिया जाएगा.

बगराम जेल में बंद क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार की कई घटनाएं हाल के दिनों में सामने आती रहीं हैं.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री इनायतुल्लाह नियाज़ी का इस अवसर पर कहना था, ''मैं बहुत ख़ुश हूं कि अफ़ग़ान बंदियों की देखरेख की ज़िम्मेदारी अफ़ग़ान अधिकारियों को सौंपी जा रही है.''

बगराम जेल राजधानी काबुल से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर है और अब इसका आधिकारिक नाम परवान बंदी गृह है.

मतभेद बरक़रार

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने इसका स्वागत किया है लेकिन बावजूद इसके इस मुद्दे पर अमरीका से मतभेद बने हुए हैं.

"मैं बहुत ख़ुश हूं कि अफ़ग़ान बंदियों की देखरेख की ज़िम्मेदारी अफ़ग़ान अधिकारियों को सौंपी जा रही है."

अफ़ग़ानिस्तान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री इनायतुल्लाह नियाज़ी

अमरीका का कहना है कि वो कुछ क़ैदियों पर अपना नियंत्रण बरक़रार रखना चाहता है.

इस जेल के तीन हज़ार क़ैदियों में लगभग 50 विदेशी भी हैं और समझौते के तहत इनका नियंत्रण अफ़ग़ान अधिकारियों को नहीं दिया गया है.

काबुल स्थित बीबीसी संवाददाता जोनाथन बील के अनुसार अमरीका जेल के कुछ हिस्से पर अपना नियंत्रण क़ायम रखना चाहता है और वो युद्ध के दौरान पकड़े गए चरमपंथियों को अफ़ग़ान अधिकारियों के हवाले नहीं करना चाहता.

निजी तौर पर बातचीत के दौरान अमरीकी अधिकारी कहते हैं कि कुछ ख़तरनाक चरमपंथियों को अगर वे अफ़ग़ान अधिकारियों के हवाले करते हैं तो इस बात का डर हैं कि कहीं उन्हें रिहा ना कर दिया जाए.

अफ़ग़ानिस्तान का ग्वांतनामो बे

लेकिन सेटर फॉर कॉन्फिलिक्ट एंड पीस स्टडीज़ के निदेशक हिकमत करज़ई के अनुसार अमरीका अपने सामरिक महत्व के लिए कुछ बंदियों को अफग़ान अधिकारियों के हवाले नहीं करना चाहता है.

बगराम जेल को अफ़ग़ानिस्तान का ग्वांतनामो बे कहा जाता है.

अप्रैल 2010 में बीबीसी ने एक जांच में पाया था कि बगराम जेल में क़ैदियों के साथ बहुत बुरा सुलूक किया जाता है. हालाकि उस समय अमरीकी सेना ने उन आरोपों को ख़ारिज कर दिया था.

जनवरी 2012 में अफ़ग़ान जांचकर्ताओं ने भी अमरीकी सेना पर बगराम जेल में बंदियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था.

इसके ठीक एक महीने बाद फ़रवरी 2012 में अमरीकी सैनिकों के ज़रिए मुसलमानों की धार्मिक किताब क़ुरान को जलाए जाने की घटना सामने आई थी जिसके कारण कई दिनों तक अफ़ग़ानिस्तान में हिंसक प्रदर्शन हुए थे.

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