अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ रहे हैं नशेड़ी

अफ़ीम की खेती

अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम की खेती को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही है

संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में नशीली दवाओं का सेवन करने वालों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है.

नशीली दवाओं और अपराध पर काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था (यूएनओडीसी) का कहना है दुनिया का सबसे बड़ा अफ़ीम उत्पादक देश अब अफ़ीम और उससे बनने वाली दूसरी चीज़ों का बड़ा उपभोक्ता भी बन गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में क़रीब तीन प्रतिशत वयस्क लोग नियमित रुप से अफ़ीम या हेरोइन का सेवन करते हैं. यह दुनिया भर में सबसे अधिक है.

उल्लेखनीय है कि दुनिया की 90 प्रतिशत अफ़ीम अफ़ग़ानिस्तान में पैदा होती है.

यूएनओडीसी के प्रमुख एंटोनियो मारिया कोस्टा का कहना है कि अफ़ग़ान अब अपनी उगाई अफ़ीम के सबसे बड़े उपभोक्ता भी बन गए हैं.

बहुत से अफ़ग़ान समस्याग्रस्त देश में जीवन की कठिनाइयों से उबरने के लिए नशा कर रहे हैं लेकिन इसने उनकी समस्या को और बढ़ाया है.

एंटोनियो मारिया कोस्टा, प्रमुख, यूएनओडीसी

रिपोर्ट के अनुसार नशीली दवा का सेवन करने वालों की संख्या पिछले पाँच सालों में बहुत तेज़ी से बढ़ी है.

इसके अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में वर्ष 2005 से अफ़ीम का नियमित सेवन करने वाले लोगों की संख्या 53 प्रतिशत और हेरोइन का सेवन करने वालों की संख्या 140 प्रतिशत बढ़ी है.

कोस्टा का कहना है, "बहुत से अफ़ग़ान समस्याग्रस्त देश में जीवन की कठिनाइयों से उबरने के लिए नशा कर रहे हैं लेकिन इसने उनकी समस्या को और बढ़ाया है."

रिपोर्ट के अनुसार कुछ इलाक़ों में परिजन ही अपने बच्चों को अफ़ीम देते हैं.

इसमें यह भी कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में नशे के आदी लोगों के इलाज की पर्याप्त सुविधा नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट कहती है कि लगभग दस लाख अफ़ग़ान, जो कि कुल आबादी का आठ प्रतिशत हैं, अब अफ़ीम, हेरोइन और भांग जैसे नशा करते हैं.

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