
नवंबर 2008 में मुंबई में हुए हमलों में 180 से ज़्यादा लोग मारे गए थे
पाकिस्तान की एक अदालत ने मुंबई हमलों के मुक़दमे की सुनवाई 14 नवंबर तक स्थागित कर दी है. अदालत ने अभियुक्तों के वकीलों की ओर से दायर एक याचिका को मंज़ूर कर लिया है जिसमें उनके ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों के दस्तावेज़ उन्हें दिए जाएँ.
आतंकवाद निरोधक अदालत के जज अकरम अवाण ने रावलपिंडी की अडयाला जेल में मुंबई हमलों के ख़िलाफ चल रहे मुक़दमे की सुनवाई शनिवार को की थी.
अदालती कार्रवाई के दौरान जेल के अंदर और बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी. सुरक्षा के कारणों से इस मुक़दमे की सुनवाई जेल के भीतर ही की जाती है.
ज़की-उर-रहमान लखवी, हमाद अमीन सादिक़ और अब्दुल वाजिद समेत सातों अभियुक्तों को जज के समक्ष पेश किया गया.
'आरोप के दस्तावेज़ सौंपे जाएँ'
पिछली सुनवाई में अभियुक्तों के वकीलों ने अदालत में एक याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कि अभियुक्तों के ख़िलाफ जो आरोप लगाए गए हैं, उन आरोपों के दस्तावेज़ उन्हें सौंपे जाएँ.
अदालत ने शनिवार को यह याचिका मंज़ूर कर दस्तावेज़ यानी अभियुक्तों के ख़िलाफ आरोप-पत्र उन के वकीलों को देने के आदेश दिए.
अभियुक्तों के वकीलों ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि उन्हें मुंबई हमलों में ज़िंदा पकड़े गए एक बंदूकधारी अजमल आमिर कसाब का वह बयान भी दिया जाए, जो उन्होंने भारतीय अदालत को दिया है.
अदालती कार्रवाई 14 नवंबर तक स्थागित कर दी गई है. जब 24 अक्तूबर को अदालत ने अभियु्क्तों के खिलाफ़ अभियोग लागू किया था तो वकीलों ने कार्रवाई का बाहिष्कार किया था.
उसके बाद जज बाकिर अली राणा ने लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दी थी कि वे इस मुकदमे की सुनवाई नहीं कर सकते, इसके बाद लाहौर हाई कोर्ट ने एक और जज अकरम अवाण को इस मामले को सुनने के लिए नियुक्त किया था.
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी जो इस मामले की जांच कर रही है, उसने कुछ समय पहले ही ज़की-उर-रहमान लखवी सहेत सातों अभियुक्तों के ख़िलाफ आरोप-पत्र अदालत में पेश कर दिए थे.
















