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'नेपाल को भारत की ज़रूरत है'

नेपाल के सत्ताधारी गठबंधन का नेतृत्व कर रही कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (यूएमएल) का कहना है की नेपाल के प्रगति करने के लिए भारत का साथ ज़रूरी है.

नेपाल मे माओवादी आंदोलन कर रहे हैं

सीपीएन (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) के चेयरमैन झलनाथ खनाल ने अपनी भारत यात्रा के दौरान बीबीसी हिन्दी के साथ दिल्ली में एक विशेष बातचीत मे ये विचार व्यक्त किए हैं.

झलनाथ खनाल ने इस दौरान वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, विदेशमंत्री एसएम कृष्णा, विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी और कम्युनिष्ट पार्टी के नेताओं एबी बर्धन और प्रकाश कारट से मुलाक़ात की है.

'माओवादी सहयोग दें'

झलनाथ खनाल का कहना था, "नेपाल मे कैसी राजनीतिक व्यवस्था होगी, कैसे नेपाल आगे बढेगा, इसका फ़ैसला नेपाल की जनता करेगी. लेकिन भारत एक मित्र राष्ट्र है और नेपाल को लेकर भारत मे एक व्यापक समझदारी है. नेपाल को अपने संघर्ष, विकास में भारत की मदद की ज़रुरत रहेगी."

नेपाल की संसद मे सबसे बड़ी पार्टी - कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) फ़िलहाल आंदोलन के रास्ते पर है और संसद की कार्रावाई पूरी तरह से ठप्प पड़ी हुई है. माओपादियों का आरोप है की नेपाल के वर्तमान राजनीतिक संकट मे भारत का हाथ है.

नेपाल के संकट से निपटने के सवाल पर झलनाथ खनाल का कहना था, "माओवादीयों का जो रैवया है, उससे स्थिति काफ़ी कठिन बन गई है. माओवादी टकराव के रास्ते पर हैं."

नेपाल मे कैसी राजनीतिक व्यवस्था होगी ये नेपाल की राजनीतिक पार्टियों और जनता को तय करना होगा, पर नेपाल को लेकर भारत मे एक व्यापक समझदारी है और नेपाल अपने विकास मे भारत को साथ लेकर ही आगे बढ सकता है.

झलनाथ खनाल, नेता नेकपा एमाले

उनका कहना था कि इस संकट से निपटने के लिए माओवादियों को समझना पड़ेगा की राष्ट्रीय सहमति के अलावा कोई और रास्ता नही है. उन्होने कहा है कि माओवादियों सहित नेपाल की सभी राजनीतिक पार्टियों की ये ज़िम्मेदारी है कि अगले सात महीने मे शांति प्रक्रिया को एक तार्किक निष्कर्ष तक पहुचाएं और संविधान तैयार करने का काम पूरा करें.

नेपाल के सेनाध्यक्ष रुकमंद कटवाल की राष्ट्रपति रामबरन यादव द्वारा बहाली को लेकर माओवादी नेता प्रचंड ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. सेनाध्याक्ष कटवाल को प्रचंड ने बर्खास्त किया था.

इसके बाद सीपीएन (यूएमएल) के नेता माधव नेपाल के नेतृत्व में नेपाली कांग्रेस और मधेशी जनाधिकार फ़ोरम ने मिलकर वंहा एक बहुमत की सरकार का गठन किया था. लेकिन माओवादियों के आंदोलन के चलते ये सरकार वंहा कुछ ख़ास नही कर पाई है.

नेपाल मे राजशाही की समाप्ती के बाद संविधान लिखे जाने का काम अगले साल यानि 2010 तक पूरा होना है. लेकिन संदेह है कि वर्तमान राजनीतिक संकट के कारण ये शायद ही पूरा हो पाए.

बीबीसी को जानिए

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