
अफ़ग़ानिस्तान में अक्तूबर का महीना अमरीकी सैनिकों के लिए बहुत जानलेवा साबित हुआ है
अफ़ग़ानिस्तान में नैटो सेनाओं ने कहा है कि दक्षिणी हिस्से में बम हमलों में कम से कम आठ अमरीकी सैनिक और एक अफ़ग़ान नागरिक मारे गए हैं.
नैटो सेनाओं ने इन हमलों को बहुत जटिल और बहुमुखी बताया जिनमें अनेक लोग घायल भी हुए हैं.
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता सेना एक प्रवक्ता ने कहा है कि देश के दक्षिणी हिस्से में दो हमले हुए हैं. एक हमले में सात सैनिक और एक अफ़ग़ान नागरिक मारे गए. दूसरे हमले में एक सैनिक मारा गया.
इन हमलों में मारे गए सैनिकों के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी गई क्योंकि पहले उनके परिजनों को सूचित किया जाएगा.
अमरीकी सैनिकों की इस मौत के बाद इस अक्तूबर का महीना आठ वर्ष की इस लड़ाई में अमरीकी सैनिकों के लिए सबसे ज़्यादा जानलेवा साबित हुआ है.
ग़ौरतलब है कि अमरीका के नेतृत्व में विदेशी सेनाओं ने अक्तूबर 2001 में अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया था और आठ वर्ष से ये लड़ाई चल रही है.
अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागॉन का कहना है कि सिर्फ़ अक्तूबर महीने में ही अमरीका के 55 सैनिक मारे जा चुके हैं.
सोमवार, 26 अक्तूबर को विभिन्न हवाई दुर्घटनाओं में कुल 14 अमरीकी मारे गए थे जिनमें 11 सैनिक भी थे.
अन्य दिनों की ही तरह, मंगलवार को हुए इन मौतों के लिए भी उच्च दर्जे की विस्फोट सामग्री के ज़रिए किए गए इस्तेमाल को ज़िम्मेदार ठहराया गया.
कहा जा रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में विदेशी सेनाएँ उच्च दर्जे की विस्फोट सामग्री के ख़तरे का सामना कर रहे हैं.
दबाव और विवाद
वाशिंगटन में बीबीसी संवाददाता एडम ब्रुक्स का कहना है कि अक्तूबर महीने में 55 अमरीकी सैनिकों के मारे जाने की ये ख़बर ऐसे समय में आ रही है जब राष्ट्रपति बराक ओबामा अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी रणनीति की समीक्षा कर रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति पद के चुनावों पर भी गहरा विवाद है
अमरीकी लोग अब भी इस बात का इंतज़ार कर रहे हैं कि क्या राष्ट्रपति बराक ओबामा अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की संक्या बढ़ाने का फ़ैसला करते हैं या नहीं. इसी फ़ैसले पर यह बात सामने आएगी कि अफ़ग़ानिस्तान में हालात और बिगड़ रहे हैं या फिर सुधार हो रहा है.
राष्ट्रपति ओबामा पर काफ़ी दबाब है कि वो अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना की ताक़त बढ़ाने के लिए और सैनिक भेजें लेकिन बहुत से अमरीकी लोग अतिरिक्त सैनिक भेजे जाने के ख़िलाफ़ भी हैं.
बीबीसी संवाददाता एंड्रयू नॉर्थ का कहना है कि अक्तूबर महीने में इतने बड़ी संख्या में अमरीकी सैनिकों की मौत के बाद और सैनिक भेजे जाने के किसी प्रस्ताव का विरोध हो रहा है.
ये ऐसे हालात में हो रहा है जब अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति पद के चुनावों के इर्दगिर्द विवाद गहराया हुआ है.














