ईसाई व्यक्ति की मौत से तनाव

पाकिस्तान में फ़ानिश मसीह नाम के एक ईसाई व्यक्ति के अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षाकर्मियों और ईसाई समुदाय के लोगों के बीच झड़प हुई है.

पुलिस का कहना है कि मृत व्यक्ति ने जेल में आत्महत्या की है. उस पर क़ुरान को नुक़सान पहुँचाने का आरोप था. लेकिन ईसाई समुदाय के नेताओं का कहना है कि फ़ानिश की हत्या की गई है.

फ़ानिश को ईश निंदा के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. उन्हें सोमवार को पांच दिन के लिए स्यालकोट जेल भेज दिया गया था.

स्यालकोट जेल के पुलिस अधीक्षक फ़ारुक़ लोधी ने एएफ़पी को फ़ोन पर बताया, “फ़ानिश को अलग कोठरी में रखा गया था जहाँ उन्होंने आत्महत्या कर ली.”

मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में मुसलमानों और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच आमतौर पर तनाव का माहौल रहा है.

तनाव

पंजाब में अल्यसंख्यक समुदाय से जुड़े मामलों के मंत्री कामरन माइकल ने कहा है कि पुलिस ने फ़ानिश के मामले को ठीक तरीके से नहीं संभाला.

उन्होंने एएफ़पी को बताया, “मैने शव देखा है और शरीर पर अत्याचार के निशान हैं.” लेकिन पुलिस इससे इनकार कर रही है.

पाकिस्तान में नेशनल कमिशन फ़ॉर जस्टिस एंड पीस ने इसे न्यायिक हिरासत में हत्या का मामला बताया है और जाँच की माँग की है.

आयोग के मुताबिक फ़ानिश पर आरोप था कि उन्होंने क़ुरान के एक हिस्से को नाली में फेंका था. इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक चर्च को आग लगा दी और अगले दिन फ़ानिश को गिरफ़्तार कर लिया गया.

फ़ानिश के अंतिम संस्कार में क़रीब 700 लोग आए और वहीं पर पुलिस से झड़प हो गई. उनकी मौत की ख़बर फैलने के बाद मानवाधिकार संगठनों ने मंगलवार को लाहौर में प्रदर्शन किए.

कुछ हफ्ते पहले ही पंजाब प्रांत में भीड़ ने सात ईसाइयों को मार दिया था और कई घरों को आग लगा दी थी.

इस घटना के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि ईश निंदा से जुड़े कानूनों पर दोबारा विचार किया जाएगा.

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