हाफ़िज़ के ख़िलाफ़ अपील ख़ारिज

हाफ़िज़ सईद

हाफ़िज़ सईद को अदालत ने अपर्याप्त सबूतों के आधार पर रिहा कर दिया था

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद को फिर से गिरफ़्तार करने की पाक सरकार की अपील सोमवार को तकनीकी आधार पर ख़ारिज कर दी.

पाकिस्तान सरकार ने उनकी रिहाई के ख़िलाफ़ अपील की थी.

ग़ौरतलब है कि इसी साल जून में अदालत ने हाफ़िज़ सईद को अपर्याप्त सबूतों के आधार पर रिहा कर दिया था.

सरकारी वकीलों का कहना है कि वे इस मामले से फिर से अपील दायर करेंगे.

हाफ़िज़ मोहम्मद सईद की पिछले साल 26 नवंबर को मुंबई पर हुए चरमपंथी हमलों में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को तलाश है.

मुंबई हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र ने जमात-उल-दावा को 'आतंकवादी संगठन' घोषित कर दिया था जिसके बाद पाकिस्तान में इस संगठन पर कार्रवाई शुरू कर दी गई थी.

रिहाई

इसके तहत 12 दिसंबर, 2008 हाफ़िज़ मोहम्मद सईद और उनके कुछ सहयोगियों को एक महीने के लिए उनके घर में ही नज़रबंद कर दिया गया था, बाद में नज़रबंदी की मियाद बढ़ा दी गई थी.

क़रीब छह महीने की नज़रबंदी के बाद सईद को लाहौर हाई कोर्ट के निर्देश पर दो जून को रिहा कर दिया गया था.

हाई कोर्ट ने सईद की रिहाई के आदेश देते हुए कहा था कि सरकार उनके मुंबई हमलों में शामिल होने का कोई सबूत नहीं दे पाई है.

सईद चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा के संस्थापक हैं. उन्होंने 2001 में लश्कर का नेतृत्व छोड़कर जमात-उद-दावा की कमान संभाल ली थी.

जमात-उद-दावा को एक इस्लामी कल्याणकारी संस्था बताया जाता है लेकिन भारत का आरोप है कि लश्कर पर पाबंदी के बाद चरमपंथी कार्रवाइयों के लिए इस संस्था का इस्तेमाल किया जाने लगा है.

हालाँकि सईद ने कहा था कि वे एक कल्याणकारी संस्था चलाते हैं जिसका मुंबई के हमलों से कोई लेना देना नहीं है.

लेकिन भारत का कहना है कि जमात-उद-दावा असल में लश्करे तैबा का ही बदला हुआ नाम है.

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