
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को जन विरोध के बाद अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा है.
पाकिस्तान में जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने राष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा दे दिया है और उन्होंने एक विदाई समारोह में भी हिस्सा लिया.
उसके बाद सीनेट के अध्यक्ष मोहम्मद मियाँ सूमरो ने कार्यवाहक राष्ट्रपति का पद संभाल लिया है.
टीवी पर सीधे प्रसारण में पूरे मुल्क को संबोधित करते हुए परवेज़ मुशर्रफ़ कहा कि वो पाकिस्तान के हित में इस्तीफ़ा दे रहे हैं.
लगभग 75 मिनट के अपने संबोधन में वो काफ़ी भावुक दिखे.
उनका कहना था,'' मैंने अपने क़ानूनी सलाहकारों, सहयोगियों और क़रीबी समर्थकों से सलाह मशविरे के बाद ये फ़ैसला किया है. मुझे चार्जशीट या महाभियोग की चिंता नहीं है, मैंने देशहित में ये फ़ैसला किया है.''
मुझे चार्जशीट और महाभियोग की चिंता नहीं है क्योंकि कोई भी आरोप साबित नहीं हो सकता है
परवेज़ मुशर्रफ़
उनका कहना था कि महाभियोग की प्रक्रिया से देश अनिश्चितता की ओर बढ़ जाता और यह व्यक्तिगत बहादुरी दिखाने का समय नहीं है.
परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि अपने पद पर रहते हुए उन्होंने अगर कोई ग़लतियाँ कीं वे अंजाने में हुईं और अब वह अपना भविष्य जनता के हाथों में सौंपते हैं.
परवेज़ मुशर्रफ़ का कहना था,'' मुझे चार्जशीट और महाभियोग की चिंता नहीं है क्योंकि कोई भी आरोप साबित नहीं हो सकता है.''
उनका कहना था,''मैं जीतूँ या हारूँ, क़ौम और मुल्क की हार होगी और राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुँचेगी. लिहाजा मैंने मुल्क और लोकतंत्र की बेहतरी के लिए ये क़दम उठाया है.''
उनका कहना था, "मुझ पर लगाए गए आरोप सिद्ध हों या न हों, यह तय है कि इससे देश की स्थिरता को आघात पहुँचेगा".

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को बर्खास्त किए जाने का बाद मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ लोग सड़कों पर उतर आए थे
मुशर्रफ़ पर महाभियोग के तहत संविधान का उल्लंघन करने और अनुचित व्यवहार करने के आरोप हैं.
उपलब्धियों का बखान
मुशर्रफ ने 1999 में सैनिक तख्तापलट के ज़रिए पाकिस्तान में सत्ता पर काबिज़ हुए थे.
अपने भाषण में उन्होंने अपने नौ साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाया.
उनका कहना था कि कुछ लोग नौ साल की नीतियों को ग़लत ठहरा रहे हैं जो ठीक नहीं है और मुल्क के साथ धोखा है.
परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान से बेपनाह मुहब्बत है और उन्होंने इसके विकास के लिए तन, मन, धन की बाजी लगा दी.
उनका कहना था कि पिछले नौ वर्षों में उन्होंने अनेक चुनौतियों का सामना किया और इसमें मुल्क की बेहतरी सबसे आगे रखी.
परवेज़ मुशर्रफ़ का कहना था कि उन्होंने दिल की गहराइयों से ‘सबसे पहले पाकिस्तान’ का नारा दिया.
उन्होंने विपक्ष के आरोपों को ग़लत ठहराया और कहा कि बदकिस्मती से कुछ लोग झूठे और बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं और झूठ को सच करने की कोशिश कर रहे हैं.
मुशर्रफ़ का कहना था कि ये आवाम को धोखा देने की कोशिश की है और इससे पाकिस्तान को नुक़सान पहुँचेगा.
उन्होंने कहा कि उन्होंने लोकतंत्र को बढ़ावा दिया, स्थानीय चुनाव और दो दो चुनाव कराए.
मुशर्रफ़ का कहना था कि उन्होंने पाकिस्तान को एक नई पहचान दी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका रुतबा कायम किया.
रास्ता देने की कोशिश
पिछले कई दिनों से ऐसी ख़बरें आ रही थीं कि ब्रिटेन और अमरीका के कूटनयिक परवेज़ मुशर्रफ़ के लिए सुरक्षित रास्ता निकालने की कोशिश में बातचीत कर रहे हैं.
ये कूटनयिक चाहते थे कि मुशर्रफ़ स्वेच्छा से पद छोड़ दें और उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुक़दमा न चलाया जाए.
दूसरी ओर पीएमएल (नवाज़) के शीर्ष नेता नवाज़ शरीफ़ ने ज़ोर देकर कहा था कि वे परवेज़ मुशर्रफ़ को कोई सुरक्षित रास्ता देने या उनके ख़िलाफ़ मुकदमा न चलाए जाने का वादा करने के ख़िलाफ़ हैं.
उल्लेखनीय है कि देशद्रोह का आरोप सिद्ध होने पर फाँसी तक की सज़ा दी जा सकती है.
लेकिन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) का कहना है कि मुशर्रफ़ पर देशद्रोह का मुक़दमा चले या नहीं, इसका फ़ैसला संसद को करना चाहिए.
उल्लेखनीय है कि मुशर्रफ़ ने पिछले वर्ष सेनाध्यक्ष का पद छोड़ दिया था. फ़रवरी महीने में हुए चुनाव में उनका समर्थन करने वाली पार्टियों को भारी हार का सामना करना पड़ा था.












