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मरीज़ पर्यटकों का रुख़ भारत की ओर
 
कम ख़र्च में बेहतर सुविधा
कम ख़र्च में बेहतर चिकित्सा की उम्मीदें लगाए लोग भारत का रुख़ कर रहे हैं

जड़ी-बूटियों और आयुर्वेद के लिए दुनिया भर में मशहूर भारत पर आज के दौर में भी विदेशी मरीज़ों की टकटकी लग गई है.

ख़बर है कि विभिन्न देशों के बहुत से मरीज़ इलाज कराने के लिए भारत की तरफ़ रुख़ कर रहे हैं लेकिन यह रुख़ पाँच सितारा अस्पतालों की तरफ़ ज़्यादा है.

वजह आईने की तरफ़ एकदम साफ़ है - बेहतर चिकित्सा और वो भी कम ख़र्च पर क्योंकि विदेशों में इलाज बहुत महंगा है.

देश-विदेश से आने वाले ये रोगी भारत के निजी अस्पतालों में अपना इलाज करवाने के लिए भर्ती हो रहे हैं.

पड़ोसी बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों से मरीज़ों का आना तो एक आम बात है लेकिन अब उत्तरी अमरीकी, ब्रिटेन और यूरोप के अन्य देशों से भी मरीज़ों का ताँता लग गया है.

ये एक तरह से 'मरीज़ पर्यटक' बन गए हैं.

अस्पतालों का यह दावा भी है कि यहाँ रोगियों को मुहैया सेवाएँ और सुविधाएँ अंतरर्राष्ट्रीय मानदंडों से कम नहीं है.

और सबसे सुविधाजनक बात है कि भारत के इन पाँच सितारा अस्पतालों में यूरोप और अमरीका के अस्पतालों के मुक़ाबले बहुत ही कम ख़र्च पर रोगियों का इलाज होता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में बहुत ही कम ख़र्च पर स्वास्थ्य सेवाओं का अच्छा स्तर इसे काफ़ी लोकप्रिय बना सकता है.

 

 हमारी चिकित्सा सुविधाएँ विश्व की किसी भी चिकित्सा व्यवस्था के साथ मुक़ाबला कर सकती हैं और सोने पर सुहागा ये कि ख़र्च बहुत कम है.

रॉय फ़र्नांडिस

 

भारत में अपोलो अस्पताल समूह के अधिकारी रॉय फ़र्नांडिस का कहना था, "हमारी चिकित्सा सुविधाएँ विश्व की किसी भी चिकित्सा व्यवस्था के साथ मुक़ाबला कर सकती हैं और सोने पर सुहागा ये कि ख़र्च बहुत कम है."

मसलन ब्रिटेन में ओपन हार्ट सर्जरी का ख़र्च बीस हज़ार डॉलर यानी क़रीब 15 लाख रूपए और अमरीका में इसका दोगुना होता है लेकिन भारत में ऐसा ऑपरेशन पाँच हज़ार डॉलर यानी साढ़े तीन लाख रूपए से भी कम में हो सकता है.

उसमें भी फ़ायदे का सौदा यह कि यह लागत बीमा कंपनियों की ज़्यादातर पॉलिसियों में वापस भी मिल जाती है.

दूसरी अच्छी बात ये है कि भारत में रोगियों को अपना इलाज करवाने के लिए ब्रिटेन और अमरीका की तरह बहुत लंबा इंतज़ार नहीं करना पड़ता है.

भारत में सरकार और निजी उद्योगपतियों ने इस क्षेत्र की संभावनाओं को बहुत जल्दी परख लिया और इस दिशा में महत्वपूर्ण क़दम भी उठाए जाने लगे.

इस वर्ष जब फ़रवरी में बजट पेश किया गया था तो सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कई ऐसी योजनाएं शुरु करने की घोषणा की जिनसे इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जा सके.

मंज़िलें

भारत के कुछ उद्योगपतियों ने भारत की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रचार के लिए इस महीने के शुरु में ब्रिटेन की यात्रा की है.

इस यात्रा के दौरान विदेशी मरीज़ों को हृदयरोग, ट्यूमर से संबंधित बीमारियों, सर्जरी और हड्डियाँ बदलने जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज भारत में कराने का न्यौता दिया गया.

ग़ौरतलब है कि भारत ने पहले ही 'आयुर्वेद' जैसी चिकित्सा प्रणालियों की सफलता की बदौलत पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है.

रॉय फ़र्नांडिस कहते हैं कि अगले 10 वर्षों में भारत विश्व भर में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रुप में उभर कर आएगा.

चिकित्सा सेवाओं में लगे लोगों का कहना तो यही है कि संजीवनी बूटी वाला देश भारत दुनिया के मरीज़ों के कष्ट हरने में जल्दी ही बड़ी कामयाबी हासिल करेगा.

 
 
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