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गुरुवार, 18 सितंबर, 2003 को 20:46 GMT तक के समाचार पंचायत की 'ग़ैर-क़ानूनी' सज़ा
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बिना पढ़ी-लिखी महिलाओं की स्थिति तो और ख़राब है
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चेन्नई से संपत कुमार
तमिलनाडु की एक अदालत ने उस मामले में हस्तक्षेप किया है जिसमें एक महिला को गाँव की पंचायत ने पाँच घंटे तक उठक बैठक कराई.
यहाँ तक कि महिला थक कर बेहोश हो गई.
बत्तीस वर्षीय सुगंधि पढ़ी-लिखी है और सरकारी दूरसंचार कंपनी में काम करती है.
उसका क़ुसूर यह था कि उसने अपने पति से तलाक़ की माँग की थी.
जुर्माने की सज़ा
यह मामला पंचायत के सामने आया और पंचायत ने सुगंधि पर पचास हज़ार रुपये का जुर्माना कर दिया.
उसके बाद उससे कहा गया कि वह जितनी बार उठक-बैठक करेगी उसका जुर्माना उतना ही कम होता जाएगा.
पाँच घंटे तक उठक बैठक करने पर उसका जुर्माना 19 हज़ार रुपये रह गया लेकिन तब तक वह निढाल हो चुकी थी और बेहोश हो कर गिर गई.
बाद में उसने जुर्माना तो चुका दिया लेकिन अपने बच्चे अपने पति को सौंपने से इनकार कर दिया.
बाद में जब उसकी माँ को गाँव से निकाले जाने की धमकी मिली तब उसने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की.
अदालत ने उसका पैसा वापस दिए जाने का आदेश दिया और पंचायत के लोगों को भी लताड़ा.
महिला अधिकारों से जुड़े संगठनों का कहना है कि जब एक शिक्षित महिला के साथ ऐसा सुलूक हुआ है तो निरक्षर महिलाओं की स्थिति का तो बख़ूबी अंदाज़ा लगाया जा सकता है. |
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