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बुधवार, 17 सितंबर, 2003 को 02:08 GMT तक के समाचार मारे गए हाथियों की पूजा
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बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने मरे हुए हाथियों की पूजा-अर्चना की
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झारखंड के कई इलाक़ों में हाथियों के उपद्रव से लोग परेशान रहते हैं और अक्सर बेक़ाबू जंगली हाथियों के ऊधम मचाने की ख़बरें आती हैं.
लेकिन जंगली हाथी भी हादसों की चपेट में आते रहते हैं, कभी रेलगाड़ी से हाथी के कटकर मरने की ख़बर आती है तो कभी लोग उसे मार डालते हैं.
झारखंड के हज़ारीबाग़ ज़िले में पिछले दिनों हुई घटना के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगा है कि जंगल पर आख़िर किसका हक़ है.
हज़ारीबाग़ के गोला इलाक़े में दो हाथियों की करंट लगने से मौत हो गई, इनमें से एक नर था एक मादा.
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इन हाथियों को 11 हज़ार वोल्ट का करंट लगा जिसे वे झेल नहीं पाए और तड़पकर मर गए.
वहाँ रहने वाले लोगों ने बताया कि 16-18 जंगली हाथियों का एक झुंड इलाक़े से गुज़र रहा था, इनमें से एक हाथी की सूँड झूलते हुए बिजली के तार से जा लगी.
दूसरा हाथी शायद पहले को बचाने की कोशिश करने लगा और वह भी बिजली की चपेट में आ गया.
अफ़सोस
मारे गए दोनों हाथियों की सूँड पूरी तरह जल गई है और वे लहूलुहान दिख रहे हैं.
हाथियों के मारे जाने की ख़बर सुनते ही आसपास से हज़ारों लोग जमा हो गए और उन्होंने इन हाथियों की पूजा शुरू कर दी.
हाथियों को साक्षात गणेशजी मानने वाले लोगों ने उनकी मृत देह के सामने अगरबत्तियाँ जलाईं और फूल चढ़ाए.
गाँववालों का कहना है कि आसपास के कई इलाक़ों में जंगल में पत्थरों के खनन का काम तेज़ी से चल रह है और ठेकेदार अक्सर विस्फोट करके चट्टानें तोड़ते हैं.
धमाकों से घबराकर हाथी अक्सर रास्ता बदलकर गाँवों की तरफ़ आ जाते हैं, लोगों का आरोप है कि वन विभाग इस बारे में कुछ भी नहीं कर रहा.
गाँव के लोग बताते हैं कि इससे पहले भी इसी इलाक़े में एक हाथी का बच्चा कुएँ में गिरकर मर गया था क्योंकि वन विभाग के अधिकारी बहुत देर से पहुँचे थे.
प्रभात ख़बर के सौजन्य से |
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