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शुक्रवार, 12 सितंबर, 2003 को 07:07 GMT तक के समाचार
गुजरात सरकार को फटकार
गुजरात दंगों में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे
गुजरात दंगों में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे

पिछले साल गुजरात दंगों के दौरान हुए बेस्ट बेकरी कांड के 21 अभियुक्तों को बरी किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को ज़बरदस्त फ़टकार लगाई है.

सुप्रीम कोर्ट ने अगले शुक्रवार को राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को अदालत में पेश होने को कहा है.


राज्य सरकार का राजधर्म लोगों की रक्षा करना और अपराधियों को सज़ा दिलाना है लेकिन ऐसा लगता है कि इस मामले में राजधर्म का पालन नहीं किया गया

सुप्रीम कोर्ट
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बेस्ट बेकरी कांड के अभियुक्तों को सबूत के अभाव में बरी किए जाने के ख़िलाफ़ विशेष याचिका दायर की थी.

आयोग ने निचली अदालत के फ़ैसले को दरकिनार कर इस कांड की सुनवाई राज्य के बाहर उपयुक्त अदालत में कराने की भी माँग की थी.

पिछले साल गुजरात दंगों के दौरान बेस्ट बेकरी कांड सबसे भयावह था, जिसमें 12 लोगों को जिंदा जला दिया गया था.

हालाँकि एनएचआरसी की विशेष याचिका के बाद गुजरात सरकार ने हाई कोर्ट में बेस्ट बेकरी कांड पर निचली अदालत के फ़ैसले को चुनौती दी थी.

एतराज

विशेष याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के काम करने के तरीक़े पर भी कड़ा एतराज जताया.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीएन खरे और जस्टिस एसवी सिन्हा की खंडपीठ ने कहा कि सरकार ने इस मामले में ढीला-ढाला रवैया अपनाया है.


कोर्ट ने मोदी सरकार के काम करने के तरीक़े पर कटाक्ष किया
उन्होंने कहा, "राज्य सरकार का राजधर्म लोगों की रक्षा करना और अपराधियों को सज़ा दिलाना है. लेकिन ऐसा लगता है कि इस मामले में राजधर्म का पालन नहीं किया गया."

अदालत ने और भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, "अगर आप अपराधियों को सज़ा नहीं दिला सकते, तो अच्छा है आप सरकार छोड़ दें."

अदालत में राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि देश में पिछले 40 सालों में न जाने कितने सांप्रदायिक दंगे हुए हैं.


अगर आप अपराधियों को सज़ा नहीं दिला सकते, तो अच्छा है आप सरकार छोड़ दें

सुप्रीम कोर्ट
उन्होंने ख़ास तौर से 1984 के दंगों का जिक्र किया और कहा कि इस मामले में भी अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं.

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से और समय की माँग की ताकि राज्य सरकार गुजरात हाई कोर्ट में दाखिल अपील में संशोधन कर सकें.

लेकिन अदालत इससे सहमत नहीं थी.

खंडपीठ ने कहा, "गुजरात सरकार ने हाई कोर्ट में जो अपील दायर की है, वह सिर्फ़ और सिर्फ़ दिखावा है."

अदालत ने कहा, "अगर राज्य सरकार कोई कार्रवाई नहीं करेगी, तो हम मामले में दखल देंगे, क्योंकि हम यहाँ खामोशी से देखने के लिए नहीं बैठे हैं."
 
 
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