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रविवार, 07 सितंबर, 2003 को 11:31 GMT तक के समाचार सीमा पर फ़िल्मी संगीत रिलीज़
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वाघा पर हुआ पिंजर फ़िल्म का प्रीमियर
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असित जौली
भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को मधुर बनाने के लिए सिर्फ़ राजनेता ही नहीं बल्कि अब मुंबई के फ़िल्मी सितारे भी आगे आए हैं.
कुछ ऐसा ही हुआ शनिवार को जब 'वाघा सीमा' पर दोनों देशों के सीमा सुरक्षाबलों के जवानों के साथ साथ मुंबई के फ़िल्मी सितारे भी खड़े हुए थे.
 'पिंजर' फ़िल्म की टीम | दरअसल, 'बॉलीवुड' के फ़िल्म स्टार वाघा सीमा पर अपनी नई फ़िल्म 'पिंजर'के संगीत के पूरा होने पर उसके रिलीज़ के लिए आए हुए थे.
'पिंजर' भारत-पाकिस्तान विभाजन के परिदृश्य में मशहूर लेखिका अमृता प्रीतम का लिखा उपन्यास है और ये फ़िल्म उसी पर आधारित है.
'पिंजर' एक पंजाबी शब्द है जिसका मतलब होता है 'अस्थि-पंजर'.
इस फ़िल्म के निर्माताओं का मानना है कि उनकी फ़िल्म 'पिंजर' भारत-पाकिस्तान संबंधों को सुधारने की दिशा में सकारात्मक योगदान दे सकती है.
बॉलीवुड की फ़िल्में भारत के साथ साथ पाकिस्तान में भी बहुत लोकप्रिय हैं.
पृष्ठभूमि
फ़िल्म अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर और इशा कोपिकर के साथ-साथ हिंदी फ़िल्मों के नए अभिनेता प्रियांशु चटर्जी और 'पिंजर' के निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी का 'वाघा सीमा' पर ज़ोरदार स्वागत किया गया.
फ़िल्म के निर्देशक 'चंद्र प्रकाश द्विवेदी' ने बताया, "ये फ़िल्म विभाजन पर आधारित नहीं है बल्कि इसमें विभाजन को एक परिदृश्य के रूप दिखाया गया है ताकि इसके चरित्रों के जरिए इतिहास को फिर से बयान किया जा सके."
मैं उस दिन के इंतज़ार में हूँ जब लाहौर और इस्लामाबाद में मेरी फ़िल्म के प्रीमियर की अनुमति मिलेगी | | चंद्रप्रकाश द्विवेदी | उन्होंने कहा कि, "फ़िल्म मुख्य रूप से उन मुसलमान, सिख और हिंदू महिलाओं की ज़िंदगियों पर बनाई गई है जो विभाजन के दौरान दंगों में अपहरण, बलात्कार और ऐसे अन्य हादसों का शिकार हो गईं थीं."
चंद्र प्रकाश द्विवेदी का कहना था, " हमारा इस फ़िल्म के पूरा होने पर 'वाघा' आना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस ऐतिहासिक चेक पोस्ट से सैकड़ों शरणार्थियों ने सीमा पार की थी."
वाघा सीमा पर पाकिस्तान के अनेक लोग भी बॉलीवुड सितारों की एक झलक देखने के लिए मौजूद थे.
मशहूर अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर ने 'सीमा' के रेंजरों को प्रेम और सौहार्द के प्रतीक रूप में एक फूलों का गुलदस्ता भेंट किया.
इस कार्यक्रम के आयोजकों का कहना था,"इस कार्यक्रम का एक संदेश पाकिस्तान के लोगों और सरकार तक बॉलीवुड को वहाँ प्रवेश दिए जाने का अनुरोध भी है."
फ़िल्म के निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने पाकिस्तान में भारतीय फ़िल्मों की कैसेटों और सीडी की चोरी से अवैध बिक्री से करोड़ों के सालाना नुक़सान का ज़िक्र किया.
उनका कहना था," मैं उस दिन के इंतज़ार में हूँ जब लाहौर और इस्लामाबाद में मेरी फ़िल्म के प्रीमियर की अनुमति मिलेगी." |
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इंटरनेट लिंक्स
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