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शनिवार, 23 अगस्त, 2003 को 12:34 GMT तक के समाचार
नई पेंशन योजना को मंज़ूरी
भविष्य निधि की तरह ही वेतन से कटौती करके पेंशन दी जाएगी.
भविष्य निधि की तरह ही वेतन से कटौती करके पेंशन दी जाएगी.

भारत सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए एक नई पेंशन योजना को मंज़ूरी दी है जिसके लिए कर्मचारियों को अपने वेतन से रक़म जमा करनी होगी.

योजना के अनुसार अब पेंशन के लिए कर्मचारियों के वेतन से उसी तरह कटौती होगी जिस तरह प्रॉविडेंट फ़ंड यानी भविष्य निधि के लिए होती है.

अभी तक पूरी पेंशन की ज़िम्मेदारी सरकार पर ही होती थी.

यह योजना नए कर्मचारियों पर ही लागू होगी. पर अभी यह घोषणा नहीं की गई है कि किस तारीख तक भर्ती किए गए कर्मचारी इस योजना के दायरे में आएँगे.

संसदीय कार्यमंत्री सुषमा स्वराज ने दिल्ली में पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि कर्मचारियों के मूल वेतन और मँहगाई भत्ते (डीए) से दस फ़ीसदी की कटौती की जाएगी और सरकार भी अपनी ओर से इतनी ही राशि मिलाएगी.


कर्मचारियों के मूल वेतन और मँहगाई भत्ते (डीए) से दस फ़ीसदी की कटौती की जाएगी और सरकार भी अपनी ओर से इतनी ही राशि मिलाएगी.

सुषमा स्वराज
यह पेंशन योजना वित्त मंत्रालय ने पेश की है और इसे एक स्वतंत्र एजेंसी चलाएगी.

इसके लिए सरकार एक 'पेंशन फ़ंड रेगुलेटरी एंड डवलपमेंट अथॉरिटी' का गठन करेगी जो पेंशन राशि की देखभाल करेगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि कर्मचारियों के मूल वेतन और मँहगाई भत्ते (डीए) से दस फ़ीसदी की कटौती की जाएगी और सरकार भी अपनी ओर से इतनी ही राशि मिलाएगी.

जमा होने वाली राशि विभिन्न बैंकों और डाकख़ानों की सहायता से एकत्र की जाएगी.

इसका उपयोग सरकारी ख़ज़ाने के अलावा कार्पोरेट बॉंड्स और इक्विटी में किया जाएगा और शेयर बाज़ार में लगाया जाएगा.

इस राशि का उपयोग करने के लिए तीन योजनाओं का प्रस्ताव रखा गया है और कर्मचारियों को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे इनमें से कोई भी एक योजना चुन सकते हैं.

राज्य सरकारों को भी यह सुविधा दी गई है कि वे जब चाहें इस योजना में शामिल हो सकते हैं.

बोझ

अब तक पेंशन का मामला सरकार ख़ुद ही संभालती थी और इसके लिए कर्मचारियों को कोई योगदान नहीं देना होता था.

अब नई योजना मक़सद सरकार पर पेंशन से होने वाले बोझ को कम करना बताया जा रहा है.

फ़िलहाल रोज़गार से जुड़े लोगों में से सिर्फ़ 11 फ़ीसदी लोगों को पेंशन योजना का लाभ मिलता है लेकिन सरकार का कहना है कि इसका बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है.

केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन पर ही सकल राष्ट्रीय आय का 1.66 प्रतिशत हिस्सा ख़र्च हो जाता है.

सरकार के अनुसार पेंशन पर सरकारी ख़र्च 1990 के बाद से ही 21 फ़ीसदी प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रहा है और वर्ष 2002-2003 में पेंशन का ख़र्च बढ़कर 23 हज़ार एक सौ 58 करोड़ रुपए तक पहुँच गया.

समाचार एजेंसियों का कहना है कि सरकार ने यह फ़ैसला बीके भट्टाचार्य समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर किया है.
 
 
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