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रविवार, 10 अगस्त, 2003 को 15:46 GMT तक के समाचार
डाक्टरों की हड़ताल ख़त्म
जूनियर डाक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ सेवाएँ प्रभावित हुईं
जूनियर डाक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ सेवाएँ प्रभावित हुईं

भोपाल से महेश पांडे

मध्य प्रदेश के पाँच बड़े शहरों में पिछले छह दिन से चल रही जूनियर डाक्टरों की हड़ताल वापस ले ली गई है. इन पाँच शहरों में मेडिकल कॉलेज के जूनियर डाक्टर अपनी माँगों के समर्थन में हड़ताल पर थे.

हड़ताल मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के उस आश्वासन के बाद वापस ली गई है जिसमें कहा गया था कि मंत्रिमंडल की एक सप्ताह के बीच बैठक होगी और डॉक्टरों की माँगों पर चर्चा होगी.

इस हड़ताल के कारण इन शहरों और आसपास के नगरों तथा गावों में स्वास्थ्य सेवाएँ बुरी तरह लड़खड़ा गई थी.

अब ख़बर है कि डाक्टर सोमवार से काम पर वापस लौट आएँगे.

इस हड़ताल के कारण या तो मरीज़ वार्डो से भाग गए थे या फिर उन्हें छुट्टी दे दी गई थी और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे थे.

दो माँगें

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की दो माँगे हैं.

वे चाहते हैं कि स्टाइपेंड 10 हज़ार रुपए महीने से बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह की जाए.

दूसरी माँग ये है कि एमडी और एमएस कोर्सों के लिए बढ़ाई गई फ़ीस वापस ली जाए.

सन 2001 तक पोस्टग्रेजुएट कोर्स के छात्रों को कोई ट्यूशन फ़ीस नहीं देनी पड़ती थी. हाल ही में सरकार ने ट्यूशन फीस 45 हजार रुपये सालाना कर दी.

एसोसिएशन ने दावा किया है कि जहाँ मध्यप्रदेश में ट्यूशन फीस 45 हज़ार रुपए है वहीं दिल्ली के ये फ़ीस 7500 रुपये, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में 13 हज़ार रुपए, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दो हज़ार रुपए, राजस्थान में 19 हज़ार रुपए और उत्तर प्रदेश में 18 हज़ार सालाना है.

एसोसिएशन का दावा है कि एमएस, एमडी के छात्रों को दूसरे राज्यों की तुलना में सबसे कम स्टाइपेंड 10 हजार रुपये प्रतिमाह मध्यप्रदेश में ही मिलता है.

मरीज़ परेशान

वैकल्पिक व्यवस्था के तहत गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों को ज़िला अस्पतालों में ले जाया गया था.

अन्य ज़िलों से भी इन बड़े अस्पतालों में डॉक्टर लाए गए लेकिन वे स्थिति संभाल नहीं पाए.

अधिकतर मरीज़ ऐसे थे जो प्राइवेट अस्पतालों का ख़र्च उठा नहीं सकते और वे बुरी तरह परेशान हुए.

हड़ताल की मार छोटे नगरों और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के आए लोगों को झेलनी पड़ी.

ये अलग बात है कि जूनियर डाक्टरों ने समानांतर अस्थाई ओपीडी चलाई हुई थी जिसमें काफ़ी मरीज़ पहुँचे लेकिन वहां साधारण इलाज ही हो पाए, ऑपरेशन आदि नहीं.
 
 
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