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मंगलवार, 05 अगस्त, 2003 को 14:26 GMT तक के समाचार
एक सच्ची दास्तान
रमज़ान के महीने की याद ने उसकी बड़ी सहायता की
रमज़ान के महीने की याद ने उसकी बड़ी सहायता की

यह भारत में जन्मी एक बच्ची की ऐसी दास्तान है जो पहली नज़र में असलियत से दूर किसी उपन्यास या फ़िल्म की कहानी प्रतीत होती है.

पर यह कोई कहानी नहीं, बल्कि उस बच्ची की दास्तान है जिसे बचपन में उसके गाँव से अपहृत कर लिया गया था और अपने अपहरणकर्ता के चंगुल से बच कर, वह किसी तरह कोलकात्ता पहुँच गई थी.

वहाँ उसे स्विटज़रलैंड के एक दम्पति ने गोद ले लिया था.

उस वक़्त यह बच्ची सिर्फ़ छह साल की थी. आज वह 29 साल की है और शहज़ादी रीस्ट के नाम से जानी जाती है.


हम कभी सपनों में भी नहीं सोच सकते थे कि 1980 से लापता हुई अपनी शहज़ादी को हम कभी भी देख पाएँगे

मोहम्मद रफ़ी
पिछले तेईस सालों से स्विटज़रलैंड में रहने के बाद, शहज़ादी रीस्ट ने पाया कि उसका संबंध असल में भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के जौनपुर से है.

शहज़ादी रीस्ट ने अपने असली माता-पिता को भारतीय पुलिस की मदद से डीएनए रक्त-जाँच के माध्यम से ढूँढ़ निकाला.

अब उसने अपने माता-पिता से मिलने वापसी का भावभीना सफ़र किया है.

हुआ ये था कि जब शहज़ादी रीस्ट छह बरस की थी, तो उसके एक रिश्तेदार ने उसे जौनपुर में उसके घर से ही उठा लिया था.

वह शहज़ादी को वाराणसी के रेलवे स्टेशन ले गया, लेकिन वह उसके चंगुल से बच निकलने में कामयाब हो गई, और किसी तरह एक रेलगाड़ी पर सवार हो कर कोलकाता पहुँच गई.

वहाँ पुलिस ने शहज़ादी को रोते-बिलखते देखा, और पुलिस उसे एक अनाथालय ले गई.

उसके कुछ ही महीने बाद, स्विटज़रलैंड के एक दम्पति ने उसे गोद ले लिया.

यादें

अगले 23 बरस शहज़ादी ने स्विटज़रलैंड में बिताए, लेकिन 23 साल तक वहाँ रहने, पढ़ने और शादी करने के बाद भी, उसे बचपन की कुछ यादें सताती रहीं.


जब मैंने हवाई अड्डे पर अपनी बच्ची को स्विटज़रलैंड के लिए विदा किया, तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं उसे डोली चढ़ा रहा हूँ

शहज़ादी के पिता
शहज़ादी को याद आया कि उसके पिता नाई थे और माँ साल के पूरे एक महीने तक सिर्फ़ रात के वक़्त ही खाना पकाती थी.

इससे यह संकेत मिला कि उसके माता-पिता मुसलमान होंगे और वे दिन रमज़ान के रहे होंगे.

फिर, पिछले वर्ष के शुरू में शहज़ादी ने भारत की पुलिस को ख़त लिख कर अनुरोध किया कि उसे जन्म देने वाले माता-पिता का पता लगाने में वह उसकी मदद करे.

शहज़ादी की दिल दहला देने वाली दास्तान प्रेस वालों को बताई गई और फिर यह एक भारतीय पत्रिका में छप गई.

शहज़ादी के पिता को उनके एक दोस्त ने यह क़िस्सा सुनाया और उन्होंने सोचा कि ये उनकी बच्ची हो सकती है, जिसे वे 1980 में खो बैठे थे.

शहज़ादी के पिता ने पुलिस से संपर्क किया, और फिर पुलिस ने शहज़ादी को उसके पिता के बारे में बता दिया.

डीएनए

लेकिन शहज़ादी के स्विस माता-पिता ने उसे तब तक अपने असली माता-पिता से मिलने की इजाज़त नहीं दी जब तक कि डीएनए जाँच के माध्यम से इस बात की पुष्टि नहीं हो गई कि ये वाक़ई शहज़ादी के असली पिता हैं.

पिछले महीने शहज़ादी अन्ततः अपने पति के साथ जौनपुर पहुच गई और अपने पिता से मिलकर, उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था.

उसके पिता, मोहम्मद रफ़ी का कहना था, ''हम कभी सपनों में भी नहीं सोच सकते थे कि 1980 से लापता हुई अपनी शहज़ादी को हम कभी भी देख पाएँगे.''

''जब मैंने हवाई अड्डे पर अपनी बच्ची को स्विटज़रलैंड के लिए विदा किया, तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं उसे डोली चढ़ा रहा हूँ.''

तो इस तरह बाबुल की दुआएँ लेती हुई, शहज़ादी अतीत की स्वप्निल यादों में खोई हुई स्विटज़रलैंड लौट गई.
 
 
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