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बुधवार, 28 मई, 2003 को 07:53 GMT तक के समाचार मिसाल बनीं नोरती बाई
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राजस्थान की एक तस्वीर ऐसी भी है
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भारत का राजस्थान प्रांत, जिसका ध्यान आते ही एकबारगी वहाँ के रेगिस्तान, बिजली-पानी की कमी और इनसे जूझते लोगों की तस्वीर उभर आती है.
इस राज्य में महिलाओं की हालत भी किसी से छिपी नहीं है.
लेकिन इसी प्रांत के एक गाँव की नोरती बाई ने अपनी दूरदृष्टि का इस्तेमाल करके लोगों के लिए एक उदाहरण पेश किया है.
उन्होंने यह भी बता दिया है कि तकनीक सिर्फ धनी लोगों के इस्तेमाल की चीज नहीं, बल्कि उन जैसी दूरदराज इलाक़े में रहने वाली महिलाएँ भी इसका इस्तेमाल अपनी सुविधा के लिए कर सकती हैं.
हाई-टेक नोरती बाई
आधुनिक तकनीक ने कैसे लोगों की ज़िदगी बदल दी है, इसका नज़ारा मिलता है नोरती बाई के घर पर.
आज पानी की कमी वाले राजस्थान प्रदेश में नोरती बाई कंप्यूटर का इस्तेमाल करके 11 गाँवों के कुओं, तालाबों और ट्यूबबेल के आँकड़े रखती हैं.
 नोरती बाई अब हाई-टेक महिला हैं | बीच में ही स्कूल छोड़ देने वाली नोरती बाई ने अपने प्रांत के गाँवों के विकास के लिए इन कंप्यूटरों का बखूबी इस्तेमाल करना जानती हैं.
बंगलौर में तकनीक और विकास पर आयोजित एक कार्यशाला में नोरती बाई ने कहा कि वे अपने राज्य के लिए पानी की क़ीमत समझती हैं, इसलिए उन्हें पता है कि इनके स्रोत की जानकारी रखना कितना फायदेमंद है.
नोरती बाई ने अपने कंप्यूटर में जल संसाधनों के बारे में सारी जानकारियाँ इकट्ठी करके रखी है.
उन्होंने बताया कि इस तरह के सर्वे में 250 गाँवों की क़रीब तीन हज़ार महिलाएँ काम कर रही हैं.
जीवन धारा बदली
नोरती बाई ख़ुद चकित हैं कि कैसे कंप्यूटर ने उनकी जीवन धारा बदल दी है.
दिन भर घर के कामकाज में जुटी रहने वाली गाँव की महिलाएँ अब न सिर्फ़ हाई-टेक हैं, बल्कि उनका एक मिशन भी है.
नोरती बाई अब अपने राज्य की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं.
उन्होंने बताया कि पहले वे समझती थीं कि कंप्यूटर गाँव वालों के लिए उपयोगी नहीं, लेकिन यह ग़लत साबित हुआ.
जानकारों का मानना है कि नोरती बाई उन बदलावों का प्रतीक हैं, जो सूचना तकनीक के कारण ग्रामीण इलाक़ों में संभव हैं.
नोरती बाई का कंप्यूटर से परिचय उस समय हुआ, जब उन्होंने एक ग़ैर सरकारी संस्था सामाजिक कार्य शोध केंद्र के लिए फील्ड वर्कर के तौर पर काम करना शुरू किया.
की-बोर्ड और माउस और उपर से सारे निर्देश अंग्रेजी में- नोरती बाई को इसमें मुश्किलें और सिर्फ़ मुश्किलें ही नज़र आई.
लेकिन उन्होंने हिंदी के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया, तो मुश्किलें धीरे-धीरे ख़त्म होने लगीं.
अब गाँव की कई महिलाएँ और लड़कियाँ उनका अनुसरण कर कंप्यूटर सीखने के लिए आगे आ रही हैं.
नोरती बाई अब इन महिलाओं और लड़कियों को कंप्यूटर के गुर सीखाती हैं. |
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