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सोमवार, 19 मई, 2003 को 16:08 GMT तक के समाचार दहेज के ख़िलाफ़ बनता माहौल
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निशा से दूसरी लड़कियों को भी प्रेरणा मिली है
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भारत में अभी हाल ही में एक लड़की निशा ने दहेज के लोभी दूल्हे को जेल की हवा खिला कर एक नई मिसाल क़ायम की है और इससे कई लड़कियों और उनके घरवालों को प्रेरणा मिली है.
निशा का अनुसरण करते हुए पिछले कुछ दिनों में दो अन्य लड़कियों ने दहेज की मांग करने वाले दूल्हों की बारात वापस कर दी.
इस महीने के शुरू में इक्कीस वर्षीय निशा शर्मा की शादी तय हुई, कार्ड छपे और बारात भी आने को ही थी कि दूल्हा दहेज़ पर अड़ गया.
उसने और सब चीज़ों के अलावा बारह लाख रुपये की मांग की और इसको लेकर निशा के पिता को न केवल बुरा-भला कहा बल्कि उनसे हाथापाई भी की.
निशा ने यह सुनते ही न केवल शादी रद्द कर दी बल्कि पुलिस को बुला लिया और लड़के को गिरफ़्तार करा दिया.
भारतीय समाज में आमतौर पर शादी का रद्द हो जाना या दुल्हन के दरवाज़े से बारात का वापस लौट जाना बहुत बुरा माना जाता है और एक तरह से वधू के घर का सम्मान ख़त्म हो जाता है.
लेकिन निशा के मामले में ऐसा नहीं हुआ, उलटे उसके इस साहसपूर्ण क़दम का इतना प्रचार हुआ कि उसके बारे में लगभग सभी राष्ट्रीय दैनिकों में ख़बरें छपीं और टेलीविज़न कैमरे उसके घर पर पहुँच गए और वह रातों रात मशहूर हस्ती बन गई.
उसे एक आधुनिक बहादुर महिला का ख़िताब मिला.
महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने भी उसकी दिल खोल कर सराहना की और निशा शर्मा की हिम्मत को देखते हुए एक राजनीतिक दल ने उसे अगले चुनाव में अपना उम्मीदवार बनने के लिए न्यौता भी दे डाला.
कुप्रथा
भारतीय क़ानून में हालाँकि दहेज़ लेना या देना अपराध है लेकिन यह कुप्रथा चोरी छिपे प्रचलन में है जिससे बहुत सी युवतियों के परिवारों को दहेज के लिए क़र्ज़ भी लेना पड़ता है जो उनकी आर्थिक कमर तोड़ देता है.
कई माता-पिता चुपचाप लड़के वालों की मांग पूरी करते रहते हैं और कई लड़कियाँ दहेज की मांग का शिकार हो जाती हैं.
ऐसे भी बहुत से मामले देखे जाते हैं कि दहेज का दानव बहुत सी युवतियों की जान ही ले लेता है.
राजधानी दिल्ली में हुई इन कुछेक घटनाओं से ये निष्कर्ष निकालना तो जल्दबाज़ी होगी के भारतीय समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहे हैं.
लेकिन ये कहना भी ग़लत न होगा कि अब माहौल बदल रहा है और भारतीय लड़कियाँ अब पहले से ज़्यादा सशक्त महसूस करने लगी हैं. |
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