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गुरुवार, 08 मई, 2003 को 18:59 GMT तक के समाचार
 
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ख़ानसामाओं को शाही गुर
 
बैरों को नज़रों का इशारा होने से भी पहले ही समझ लेना चाहिए
बैरों को नज़रों का इशारा होने से भी पहले ही समझ लेना चाहिए
मुंबई से मोनिका चड्ढा

भारत में राष्ट्रपति की दावतों में शामिल होने वाले लोग अब शाही खानपान की उम्मीद कर सकते हैं क्योंकि राष्ट्रपति के ख़ानसामाओं और बैरों को अब शाही अंदाज़ सिखाए जा रहे हैं.

ख़ानसामाओं और बैरों को अब सिखाया जा रहा है कि शाही अंदाज़ में मेहमानों से कैसे पेश आएं, चाय किस तरह पेश की जाए और टाई भी शाही अंदाज़ में कैसे बाँधी जाए.

और यह भी कि भारत के प्रथम नागरिक की दावत पर आने वाले मेहमानों को 11 व्यंजनों की थालियाँ कैसे पेश की जाएं.

ये शाही अंदाज़ और तौर तरीक़े सिखा रहे हैं ब्रिटेन के शाही ख़ानदान के रसोइया यानि ख़ानसामा रहे स्टीफ़न हर्स्ट.

इन लोगों को मुंबई के एक पाँच सितारा होटल 'बोम्बे' में ही ये शाही नुस्खे सिखाए जा रहे हैं.

हर्स्ट भारतीय राष्ट्रपति के ख़ानसामाओं को प्रशिक्षण देने पर ख़ुद को बहुत ख़ुशक़िस्मत मानते हैं और बेहद ख़ुश महसूस करते हैं.

"इस प्रशिक्षण कार्य के दौरान मैंने जाना है कि वे बड़ी बड़ी दावतें और महफिलें बड़ी कुशलता से आयोजित करते हैं लेकिन उनके काम करने के तरीक़े में अभी तेज़ी और फ़ुर्ती की ज़रूरत है."

हर्स्ट का मानना है, "शाही नुस्ख़े सिखाने से उनमें व्यावसायिकता बढ़ेगी और उनका काम और ज़्यादा आकर्षक बनेगा."

पूर्णता

हर्स्ट की नज़र में ख़ानसामा को आज के दौर में बहुमुखी तौर तरीक़ों वाला और हर काम में ख़ुद की समझदारी और अक्लमंदी दिखाने वाला होना चाहिए.

यह भी गुर सिखाए जा रहे हैं कि बैरे और खामसामा किसी से टकराएं या रास्ते में भी ना आएं और हर वक़्त, हर किसी के बुलाने पर हाज़िर भी रहें.

यहाँ तक कि राष्ट्रपति को नींद से कैसे जगाया जाए यह भी प्रशिक्षण में शामिल है.

हर बारीक़ी पर नज़र है

इसके पीछे मक़सद यही है कि भारतीय राष्ट्रपति के निजी स्टाफ को भी उतना ही शाही और व्यावसायिक बना दिया जाए जितना कि दुनिया के किसी भी बेहतरीन देश के हैं.

विचार

ख़ानसामाओं और बैरों को शाही अंदाज़ सिखाने का विचार भी एक कारोबारी विचार है.

दरअसल ब्रिटेन के शाही ख़ानसामा रह चुके स्टीफ़न हर्स्ट को होटलों के कारोबारी लीला ग्रुप के चेयरमैन कैप्टन नायर ने अपने स्टाफ को प्रशिक्षण देने के लिए आमंत्रित किया था.

राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने जब यह सुना तो उन्होंने अपने स्टाफ को भी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल करने की पेशकश कर दी.

कैप्टन नायर कहते हैं, "राष्ट्रपति ने मुझे बहरीन में फ़ोन किया और कहा कि मेहमानों की आवभगत के लिए क्यों न बेहतरीन से बेहतरीन माहौल मुहैया कराया जाए."

 हमें रोज़मर्रा के तौर तरीक़े और विदेशी मेहमानों की आवभगत करने के शाही गुर सीखने को मिल रहे हैं
 
ख़ानसामा नूर मोहम्मद

"राष्ट्रपति भवन एक ऐसी जगह है जहाँ तमाम विदेशी ख़ास मेहमान भारतीय मेहमाननवाज़ी की छाप दिल में लेकर वापस जाते हैं."

कैप्टन नायर कहते हैं कि राष्ट्रपति भवन के मेहमाननवाज़ यानि बटलर एक तरह से दुनिया भर के लिए हमारे साँस्कृतिक दूत हैं इसलिए उन्हें शाही तौरतरीक़े सिखाना एक व्यावसायिक क़दम है.

नए अंदाज़

राष्ट्रपति भवन के हेड बटलर यानि ख़ानसामा नूर मोहम्मद कहते हैं कि इस प्रशिक्षण से उन्हें ख़ुद को निखारने में बड़ी मदद मिलेगी.

"इस प्रशिक्षण से हमें रोज़मर्रा के तौर तरीक़े और विदेशी मेहमानों की आवभगत करने के शाही गुर सीखने को मिल रहे हैं."

एक अन्य ख़ानसामा कुंदन सिंह का मानना है कि इस प्रशिक्षण से वे राष्ट्रपति की शाही अंदाज़ में ऐसी ख़िदमत कर सकेंगे जैसी पहले नहीं की गई.

इस तरह अब यह उम्मीद की जा सकती है कि राष्ट्रपति के मेहमान स्वागत में बेहतरीन सजावट के साथ साथ शाही ख़ानपान और तौरतरीक़ों का भी लुत्फ़ उठा सकेंगे.

 
 
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