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मंगलवार, 24 दिसंबर, 2002 को 19:00 GMT तक के समाचार रामकथा पर मची 'महाभारत'
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रामकथा के लिए प्रवचनकर्ता मुरारी बापू को बुलाया जा रहा है
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राजस्थान के राज्यपाल ने घोषणा की है कि नए साल के पहले सप्ताह में राज्य में बड़े पैमाने पर रामकथा का आयोजन किया जाएगा और उससे मिलने वाला पैसा सूखा राहत में खर्च किया जाएगा.
 राज्यपाल के फ़ैसले पर विवाद | राज्यपाल अंशुमान सिंह की इस योजना को लेकर काफ़ी विवाद खड़ा हो गया है.
घोषणा की गई है कि प्रख्यात कथावाचक मुरारी बापू एक सप्ताह तक रामकथा सुनाएँगे.
पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ यानी पीयूसीएल ने राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को एक पत्र लिखकर राज्यपाल की शिकायत की है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पत्र में कहा गया है, "सप्ताह भर चलने वाले रामकथा पाठ का आयोजन करके राज्यपाल अपने संवैधानिक पद और राज्य के संसाधनों का दुरूपयोग कर रहे हैं."
पीयूसीएल ने कहा है कि इतने बड़े पैमाने पर "रामकथा का आयोजन करके राज्यपाल देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान का अपमान कर रहे हैं."
हमारे संवाददाता का कहना है कि पूरे जयपुर शहर में पोस्टर लगे हैं जिसमें चार जनवरी से बारह जनवरी तक होने वाले रामकथा का ब्यौरा दिया गया है और राजभवन को इसका आयोजक बताया गया है.
तैयारियाँ
जयपुर में सरकारी अधिकारियों की देखरेख में बड़े पैमाने पर रामकथा की तैयारियाँ चल रही हैं.
 राजस्थान में भीषण सूखा पड़ा है | अमरूदों का बाग नाम के पार्क में एक लाख लोगों के बैठने और भजन-कीर्तन की व्यवस्था की जा रही है.
राज्यपाल के इस फ़ैसले का विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि वे रामकथा के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन संवैधानिक पद पर बैठने वाले व्यक्ति को सरकार के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बनाए रखना चाहिए.
राजभवन
राजभवन के सूत्रों का कहना है कि रामकथा के आयोजन में कोई ख़राबी नहीं है और इससे मिलने वाले धन से सूखा पीड़ितों की सहायता हो सकेगी.
राजभवन के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि इस कार्यक्रम में राजनीतिक मक़सद नहीं ढूँढ़ा जाना चाहिए क्योंकि राज्यपाल हर धर्म के आयोजन में शामिल होते हैं.
कई ग़ैर-सरकारी संगठनों ने राज्यपाल के इस फ़ैसले के विरोध में 28 दिसंबर को प्रदर्शन करने की घोषणा की है. |
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राजस्थान सरकार |
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