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शुक्रवार, 20 दिसंबर, 2002 को 21:04 GMT तक के समाचार भारत के शैक्षिक रेडियो स्टेशन
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विश्वविद्यालयों को बहुत आशाएँ हैं एफ़एम स्टेशनों से
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भारत सरकार ने देश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को अपने रेडियो स्टेशन चलाने की अनुमति देने का फ़ैसला किया है.
सरकार के इस फ़ैसले का शिक्षा जगत में ज़बरदस्त स्वागत हुआ है.
शैक्षिक कार्यक्रमों के अलावा हम पारंपरिक और लोक संगीत पर भी ध्यान देना चाहेंगे | | प्रोफ़ेसर एस एम साजिद, जामिया विश्वविद्यालय | सरकार रेडियो स्टेशनों के लिए शिक्षण संस्थानों से कोई लाइसेंस शुल्क नहीं लेगी.
भारत में रेडियो प्रसारण 1927 में शुरू हुआ था, लेकिन हाल तक प्रसारण पर सरकार यानि सरकारी प्रसारण संस्था आकाशवाणी का एकाधिकार रहा है.
सूचना एवं प्रसारण मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थानों और आवासीय विद्यालयों को एफ़एम रेडियो स्टेशन चलाने की अनुमति होगी.
उन्होंने कहा इससे स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिल सकेगा.
एफ़ एम स्टेशन
शिक्षण संस्थानों के रेडियो स्टेशनों के पास आधा किलोवाट तक क्षमता के ट्रांसमीटर होंगे. ऐसे ट्रांसमीटरों से पाँच किलोमीटर की दूरी तक प्रसारण किए जा सकेंगे.
ऐसे किसी रेडियो स्टेशन की स्थापना पर चार से आठ लाख रुपए का ख़र्च आने की संभावना है.
दिल्ली स्थित विश्वविद्यालय जामिया मिलिया इस्लामिया की रेडियो परियोजना से जुड़े प्रोफ़ेसर एस एम साजिद ने बीबीसी को बताया कि विश्वविद्यालय ने इस आशय का प्रस्ताव सरकार को सौंप दिया है.
उन्होंने कहा, "शैक्षिक कार्यक्रमों के अलावा हम पारंपरिक और लोक संगीत पर भी ध्यान देना चाहेंगे."
साजिद ने कहा कि रेडियो स्टेशन पाठ्यक्रमों में समर्थन देने के अलावा मनोरंजन भी प्रदान कर सकेंगे.
दिल्ली विश्वविद्यालय भी अपना रेडियो स्टेशन शुरू करने की तैयारी कर रहा है.
शैक्षिक रेडियो स्टेशनों के बारे में शीघ्र ही विस्तृत नियम बनाए जाएँगे. इन स्टेशनों पर ज़िला स्तर के अधिकारियों की नज़र रहेगी. |
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