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शनिवार, 13 सितंबर, 2003 को 13:22 GMT तक के समाचार गर्भ में बच्चे की मुस्कान
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तनावमुक्त माता के गर्भ में बच्चे की मुस्कान
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एक चिकित्सक ने दावा किया है कि गर्भ में भी बच्चे मुस्कराते और रोते हैं, आँखें मटकाते हैं.
अल्ट्रासाउंड तकनीक में हुई प्रगति ने अब ये संभव बना दिया है कि चिकित्सक गर्भ में पल रहे बच्चे के चेहरे के भाव को पढ़ा जा सके.
पहले 2-डी स्कैनिंग से सिर्फ़ आईबॉल्स की गतिविधियों का अंदाज़ा लगता था लेकिन 4-डी स्कैनिंग से साफ हो गया है कि वे पलकें खोलते हैं | | डॉ. कैम्पबेल | इससे पहले कहा जाता था कि बच्चे जन्म के बाद ही मुस्कराना सीखते हैं, वो भी माँ की नकल कर.
नया अध्ययन डॉ. स्टुअर्ट कैम्पबेल ने किया है. इसके लिए वो 2001 से ही एक 4-डी स्कैनर के ज़रिए अजन्मे शिशुओं की तस्वीरें उतार रही थीं.
उन्होंने कहा, "वे गर्भाशय के भीतर साँस लेने जैसी मुद्रा अपनाते हैं, जबकि वहाँ हवा नहीं होता.वे आँखें मींचते हैं, जबकि वहाँ प्रकाश नहीं होता. यानी कुल मिलाकर यह कि वे जन्म लेने की तैयारी कर रहे होते हैं."
ग़ौरतलब है कि जन्म के छह महीने बाद ही बच्चों के चेहरे पर आमतौर पर मुस्कान के भाव देखने को मिलते हैं.
4-डी स्कैनिंग
कैम्पबेल ने कहा कि इससे ज़ाहिर होता है कि बच्चे गर्भ में अपेक्षाकृत तनावमुक्त वातावरण में होते हैं, जबकि जन्म के तुरंत बाद उन्हें बिल्कुल ही अलग वातावरण से तालमेल बिठाना पड़ता है.
उन्होंने कहा, "पहले 2-डी स्कैनिंग से सिर्फ़ आईबॉल्स की गतिविधियों का अंदाज़ा लगता था लेकिन 4-डी स्कैनिंग से साफ हो गया है कि वे पलकें खोलते हैं."
हालाँकि उन्होंने कहा कि गर्भ में बच्चे की मुस्कान को पूरी तरह जन्म लेने तैयारी से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, ये एक रिफ़लेक्स मात्र भी हो सकता है.
कैम्पबेल ने कहा कि मुस्कान के पीछे सही कारण क्या हो सकता है, अभी कहना मुश्किल है, लेकिन शायद यह तनावमुक्त माहौल में बच्चे की सहज प्रतिक्रिया हो सकती है.
नवविकसित 4-डी स्कैनर विस्तृत और गतिमान थ्री डी चित्र दिखाता है.
इससे पता चलता है कि बच्चे गर्भ के 15वें सप्ताह से हिलने-डुलने लगते हैं, 18 वें सप्ताह से जम्हाई लेने और मुस्कराने लगते हैं, जबकि 26वें सप्ताह से वे आँखें मींचना और रोना सीख जाते हैं.
गर्भपात विरोधी गुटों ने नए अध्ययन को इस बात के सबूत के रूप में देखा है कि भ्रूण भी आम जीवन का रूप होता है. |
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