|
|
 |
शनिवार, 23 अगस्त, 2003 को 15:26 GMT तक के समाचार कमज़ोर दिलों के लिए उम्मीद
|

नए उपकरण से हृदय के प्रत्यारोपण की ज़रुरत नहीं पड़ेगी
|
कमज़ोर दिल वालों के लिए अब उम्मीद की कुछ किरण नज़र आ रही है.
ब्रितानी शोधकर्ता हृदय की कृत्रिम मांसपेशियाँ विकसित करने में जुटे हुए हैं जिनसे दिल को कुछ मज़बूती मिल सकेगी.
इसका उद्देश्य ऐसे कमज़ोर हृदयों को अतिरिक्त ताक़त देना है जो ठीक तरह से काम नहीं कर पा रहे हैं.
इससे उन मरीज़ों को हृदय प्रत्यारोपण की ज़रूरत नहीं पड़ेगी जिनका हृदय ठीक तरह से काम नहीं कर पा रहा है.
इस उपकरण की ख़ासियत है कि यह आदमी के दिल का ही उपयोग करता है और खून के संपर्क में नहीं आता इससे रक्त कणों को नुक़सान की आशंका कम हो जाती है | | डॉ मार्टिन लेवेस्ली | ब्रिटेन के लीड्स में काम कर रहे शोधकर्ताओं ने इसे 'हार्ट ब्लैंकेट' यानी हृदय के लिए ऊपरी आवरण का नाम दिया है.
दुनिया भर में हृदय रोगियों की बड़ी संख्या है. यहाँ तक कि ब्रिटेन में ही हर दिन सात सौ लोगों को दिल का दौरा पड़ता है और दिल की बीमारियों से तीन सौ लोगों की मौत हो जाती है.
इस समय दिल के मरीज़ों को मशीनी पंप लगाने की सुविधा है पर यह हृदय प्रत्यारोपण होने तक के लिए एक अस्थाई सुविधा होती है.
चूंकि इससे मशीन से ख़ून का संचार होता है इसलिए इससे कई बार धमनियों पर बुरा असर पड़ता है.
नया उपकरण
नए शोध का मक़सद रोगी के हृदय को ही उपयोग में लाना है.
इससे पहले डॉक्टरों ने पीठ की माँसपेशियों का उपयोग किया था पर वह बहुत उपयोगी साबित नहीं हुआ.
पर लीड्स में जो माँसपेशियाँ तैयार की जा रही हैं वे ठीक उसी तरह काम करती हैं जिस तरह दिल काम करता है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि कृत्रिम माँसपेशियों से हृदय की क्षमता दस प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है.
अल्ट्रॉसोनिक मोटर
ये कृत्रिम माँसपेशियाँ दरअसल सूक्ष्म अल्ट्रॉसॉनिक मोटरों का उपयोग करती हैं और हृदय के आसपास एक आवरण का निर्माण करती हैं.
इस आवरण पर जब बिजली प्रवाहित की जाती है तब वह धड़कने में दिल की सहायता करता है.
इस उपकरण को हृदय के चारों ओर बेल्ट की तरह बाँध दिया जाता है और इसके लिए पेसमेकर की तरह ही बाहरी बैटरी का उपयोग किया जा सकता है.
लीड्स विश्वविद्यालय के व्याख्याता डॉ मार्टिन लेवेस्ली का कहना है, ''ज़्यादातर मशीनें दिल का उपयोग नहीं करतीं पर ख़ून के सीधे संपर्क में होती हैं.''
उनका कहना है, ''इस उपकरण की ख़ासियत है कि यह आदमी के दिल का ही उपयोग करता है और खून के संपर्क में नहीं आता जिससे रक्त कणों को नुक़सान की आशंका कम हो जाती है.''
अभी इस उपकरण को दिशा निर्देश दिए जाने हैं जिससे यह तय हो सके कि किस वक्त इसे किस गति से काम करना चाहिए. |
|
|
|