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मंगलवार, 03 जून, 2003 को 18:53 GMT तक के समाचार बच्चा बोलना कैसे सीखता है?
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बच्चों से बातें करते रहना, उनके साथ खेलना ज़रूरी है
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कितना ख़ुश होते हैं माँ-बाप, जब उनका बच्चा बोलना सीखता है, पहली बार मामा पापा कहता है. लेकिन बच्चा यह कैसे सीखता है?
वैज्ञानिक अनुसन्धान से पता चला है कि बच्चा भी उसी तरह सीखता है, जिस तरह पालतू तोता-मैना सीखते हैं.
वे आस-पास के लोगों की बोली की नक़ल करते हैं और भाव-भंगिमाओं से प्रेरित होते हैं.
 बच्चे बोली की नक़ल करते हैं | अमरीका के पैनसिल्वेनिया स्थित फ़्रैंकलिन एंड मार्शल कॉलिज के माइकेल गोल्डश्टाइन और उनके साथी शोधकर्त्ताओं ने प्ले सेशंज़ यानी क्रीड़ा-काल के दौरान आठ महीनों के शिशुओं और उनकी माताओं के व्यवहार का अध्ययन किया.
पहले तो उन्होंने शिशुओं की मुँह से निकलने वाली आवाज़ों और उन ध्वनियों को लेकर की गई उनकी माताओं की प्रतिक्रियाओं का सामूहिक अध्ययन किया.
फिर उन्होंने माँओं के दो वर्ग बनाये.
एक वर्ग की माँओं से कहा गया कि वे अपने बच्चे की आवाज़ों के जवाब में मुस्कुराएँ, उसके निकट जाएँ और उसे छुएँ या अपने साथ लगाएँ.
दूसरे वर्ग की माताओं की प्रतिक्रियाओं को सहज रूप से होने दिया गया.
शोधकर्त्ताओं ने इन सबका विश्लेषण करने पर पाया कि पहले वर्ग के शिशुओं ने जल्दी बोलना सीखा. इन शिशुओं की आवाज़ों में वर्णमाला के अक्षर अपेक्षाकृत ज़्यादा थे और वे व्यंजनों से स्वरों की ओर जाने में भी तेज़ी दिखा रहे थे.
यहाँ ब्रिटेन की एग्ज़िटर यूनिवर्सिटी के डॉ. ऐलन स्लेटर ने भी इस निष्कर्ष की पुष्टि की है.
वह कहते हैं, "अगर बच्चों को बोलते समय प्रोत्साहन न दिया जाए, तो वे देर से भाषा सीखते हैं. बच्चों के बोलने के जवाब में बोलना चाहिए और मुस्कुराना, उन्हें छूना और हाव-भाव आदि का प्रदर्शन करना चाहिए". |
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