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मंगलवार, 20 मई, 2003 को 02:40 GMT तक के समाचार माइक्रोसॉफ़्ट की आड़ में वायरस
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कंप्यूटरों तक पहुँचने के लिए माइक्रोसॉफ्ट के नाम का सहारा
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इंटरनेट का उपयोग करने वाले लोगों को एक नए तरह के कंप्यूटर वायरस के ख़तरे के बारे में आगाह किया गया है. यह वायरस माइक्रोसॉफ़्ट के संदेश का रूप धारण कर हमला करता है.
वायरसों के ख़िलाफ़ काम करनेवाली कंपनियों ने चेतावनी दी है कि 'सपोर्ट एट माइक्रोसॉफ़्ट डॉटकॉम' नाम से आने वाले ईमेल संदेशों से सावधानी से निपटा जाना चाहिए.
माइक्रोसॉफ़्ट की टेकनिकल सपोर्ट टीम इस तरह की फ़ाइल नहीं भेजती. इसलिए ऐसे संदेशों पर क्लिक करने से पहले हमें दो बार सोचना चाहिए | | ग्राहम क्लुली | हालाँकि ये संदेश अन्य कई नामों से भी सामने आ सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे संदेशों के साथ आने वाले अटैचमेंट को खोलने पर कंप्यूटर पैलिह नामक वायरस के प्रभाव में आ जाता है.
यह वायरस अब तक 69 देशों में पाँव पसार चुका है.
उल्लेखनीय है कि कंप्यूटर वायरसों का प्रोग्राम लिखने वाले हमेशा से ऐसे तरीक़ों की तलाश में रहे हैं कि जिनके ज़रिए कोई संदेह पैदा किए बिना कंप्यूटरों तक पहुँचा जा सके. और माइक्रोसॉफ़्ट जैसी कंपनी के नाम से ऐसा करना ऐसी ही एक चाल है.
चालाकी
वायरसों के ख़िलाफ़ काम करने वाली कंपनी सोफोज़ के वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार ग्राहम क्लुली के अनुसार नया वायरस इस मायने में अलग है कि यह अटैचमेंट खोलने के लिए लोगों को लुभाने की कोई ख़ास कोशिश नहीं करता.
उन्होंने चेतावनी दी, "माइक्रोसॉफ़्ट की टेकनिकल सपोर्ट टीम इस तरह की फ़ाइल नहीं भेजती. इसलिए ऐसे संदेशों पर क्लिक करने से पहले हमें दो बार सोचना चाहिए."
नए वायरस की फ़ाइल 'डॉट पीआईएफ़' एक्सटेंशन के साथ आती है जो कि कोई ज़्यादा प्रचलित नहीं है.
क्लुली ने कहा, "डॉट ईएक्सई और डॉट वीबीएस जैसी फ़ाइलों से परिचित लोगों को शायद पता नहीं कि डॉट पीआईएफ़ एक्सटेंशन वाली फ़ाइलें भी ख़तरनाक हो सकती हैं."
नए वायरस को पहली बार 17 मई को ईमेल स्कैनिंग कंपनी मेसेज़लैब्स ने पकड़ा. शुरू में इसकी कॉपी नीदरलैंड से आई.
बीबीसी ऑनलाइन को भी नए वायरस वाले कई ईमेल संदेश मिल चुके हैं. |
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इंटरनेट लिंक्स
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सोफोज़ |  |
मेसेजलैब्स |
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