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सोमवार, 12 मई, 2003 को 06:38 GMT तक के समाचार हेपेटाइटिस बी का नया इलाज
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हेपेटाइटिस बी के इलाज के वर्तमान तरीके असरदार नहीं हैं
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अमरीका में वैज्ञानिकों ने दुनिया भर में जिगर की सबसे गंभीर बीमारी हेपेटाइटिस बी का एक नया इलाज ढूंढने का दावा किया है.
इस नए इलाज में उन जेनेटिक तत्वों पर वार किया जाता है जो इस रोग के विषाणुओं से उत्पन्न होते हैं.
विज्ञान पत्रिका नेचर बायोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार अभी ये प्रयोग चूहों पर किए गए हैं.
मगर शोधकार्य में लगे वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि ये तकनीक इंसानों के लिए भी कारगर साबित हो सकती है.
प्रयोग
कैलिफ़ोर्निया के वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग में हेपेटाइटिस बी से ग्रस्त चूहों की पूंछों में आरएनए नाम का एक रसायन डाला.
उन्होंने पाया कि आरएनए के छोटे अणु रोग के विषाणु के अपने दो आरएनए अणुओं के साथ मिलकर एक बंधन बनाते हैं जिससे विषाणु के प्रसार पर अच्छा ख़ासा असर पड़ता है.
और हेपेटाइटिस बी के विषाणु जितने कम होंगे जिगर को उतना ही कम नुक़सान होगा.
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यह इलाज इंसानों में भी सफल रहता है तो वायरस से पैदा होनेवाली अन्य बीमारियों की भी रोकथाम की जा सकती है.
हेपेटाइटिस बी
हेपेटाइटिस बी जिगर को प्रभावित करनेवाली एक बेहद गंभीर और आम बीमारी है जो पूरी दुनिया में पाई जाती है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इस बीमारी से हर साल लगभग 10 लाख लोग मारे जाते हैं.
हेपेटाइटिस बी के विषाणु जिगर को नुक़सान पहुँचाते हैं जिससे बाद में कैंसर और अन्य बीमारियाँ होने की आशंका रहती है.
हेपेटाइटिस बी से बचने के लिए हालाँकि एक टीका बनाया जा चुका है लेकिन अगर किसी को यह बीमारी हो जाए तो उसके लिए अभी कोई असरदार इलाज नहीं है. |
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