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मंगलवार, 11 मार्च, 2003 को 07:05 GMT तक के समाचार राइसिन से कैंसर का इलाज
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घातक बीज जीवनदायी भी हो सकते हैं
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राइसिन को अब तक एक घातक जैविक हथियार के रूप में ही जाना जाता रहा है पर अब पता चला है कि इसमें जीवनदायी शक्ति भी ज़बरदस्त होती है और यह कैंसर के इलाज में कारगर हो सकता है.
चिकित्सक इसका उपयोग कैंसर के रोगाणु को ख़त्म करने के लिए करना चाहते हैं.
यह एक ऐसे प्रोटीन में मिल सकता है जो 'लिम्फोमा' कोशिकाओं को ख़त्म करता है और वह भी बिना किसी घातक 'साइड इफेक्ट' के.
अरंडी के बीज से राइसिन निकाला जाता है.
यह एक प्राकृतिक ज़हर होता है और बेहद घातक जैविक हथियार माना जाता है.
शुरू में जब परीक्षण के तौर पर कुछ मरीजों पर इसका प्रयोग किया गया तो उनमें रक्त वाहिनियों, खासकर फेफड़ों की रक्त वाहिनियों पर असर डालने वाले लक्षण उभर आए, जिसे 'वैस्कुलर लीक सिंड्रोम' कहा जाता है.
हालांकि टेक्सास विश्वविद्यालय के एक दल मानता है कि उन्होंने विषाणु में ऐसे जेनेटिक परिवर्तनों के उपाय ढूढ़ लिए हैं जिससे वह मानव शरीर के लिए कम नुक़सानदेह हो और कैंसर की कोशिकाओं के लिए ज़्यादा मारक हो.
वैज्ञानिकों ने इसका प्रयोग चूहों पर करके देखा है और इसे कारगर पाया है.
उधर साउथम्पटन विश्वविद्यालय में ब्रिटेन के कुछ वैज्ञानिक एक दूसरे विषैले पदार्थ को लेकर कैंसर पर ही काम कर रहे हैं.
उनका दावा है कि उनके ''विष'' से रक्त वाहिनियों की समस्या नहीं हो रही है.
इस दूसरे प्रयोग से वैज्ञानिक उत्साहित हैं. |
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