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शुक्रवार, 17 जनवरी, 2003 को 10:30 GMT तक के समाचार क्या डायनासोर उड़ते भी थे?
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पक्षियों को आज डायनासोरों का सच्चा संबंधी माना जाता है
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यह कल्पना मात्र ही रोमाँचकारी है कि डायनासोर जैसे विशालकाय जीव भी कभी उड़ते होंगे.
अब वैज्ञानिकों ने इस पर शोध किया है कि डायनासोरों ने उड़ना कैसे सीखा होगा.
अमरीका के एक वैज्ञानिक के अनुसार डायनासोरों ने जब अपने अगले पंजों से कुछ ऊँचाई पर चढ़ने की कोशिश की होगी तो वे उड़ना भी सीख गए होंगे.
अमरीका के मोनटाना विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक प्रोफेसर केनेथ डायल कहते हैं कि उसके बाद से बस प्राकृतिक रूप से उनके पंख विकसित हो गए और वे उड़ने वाले जीव बन गए होगे.
 "डायल का शोध क्रांतिकारी" | यह विचार मौजूदा दौर के उन पक्षियों के एक अध्ययन पर आधारित है जो पंख होने के बावजूद उड़ नहीं सकते लेकिन बाज़ों से बचने की कोशिश में अपने पंखों को फड़फड़ाते हैं और अक्सर बच निकलने में कामयाब हो जाते हैं.
यह पाया गया है कि पंख फड़फड़ाने की यह प्रक्रिया उन पक्षियों के पंखों को हिलाने कि प्रक्रिया से अलग होती है जो उड़ने में भलीभाँति सक्षम होते हैं.
प्रोफेसर डायल कहते हैं कि इस प्रक्रिया में पक्षी पहाड़ों की ढलान के सहारे अपने पंख फड़फड़ाते हुए उड़ने की कोशिश करते हैं और जिससे अपना संतुलन क़ायम रखने में ज़्यादा मुश्किल नहीं होती.
पहाड़ों के ढलान पर उड़ने में तो वे पक्षी भी कामयाब होते देखे गए जिनके पंख या तो बिल्कुल काट दिए गए थे या कुछ क़तर दिए गए थे.
प्रोफेसर डायल का निष्कर्ष है कि पंखों को फड़फड़ाने की इस प्रक्रिया के एक लंबी कोशिश और दौर के बाद पक्षी और उनके पूर्वज, जिनमें डायनासोर भी शामिल हैं, ख़ुद को हवा में उड़ाने में कामयाब हो गए होंगे.
डायनासोरों के अवशेषों के अध्ययन से पता चलता है कि उनके भी पंख रहे होंगे लेकिन वे पूरी तरह उड़ने में कामयाब नहीं हुए, यह एक आज भी एक पहेली ही है.
प्रोफेसर डायल कहते हैं, "मुश्किल ये है कि आप आधे अधूरे पंखों को किस तरह परिभाषित करेंगे."
विरोधाभास
इस विचार पर ही काफी वाद विवाद रहा है कि क्या डायनासोरों ने भी कभी उड़ने की कोशिश की होगी और क्या वे कभी उड़ने में कामयाब हुए होंगे.
 डायनासोरों के उड़ने का विचार आज भी एक पहेली | कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि ज़मीन पर रहने वाले पक्षियों के पंख तेज़ी से उगे और बढ़े होंगे जिनसे उन्हें तेज़ी से उड़ने में मदद मिली होगी और फिर वे आसमान की परवाज़ भरने में भी कामयाब हो गए.
जबकि कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि जब ये पक्षी किसी पेड़ से नीचे की तरफ़ गिरते होंगे और अपने पंख फड़फड़ते होंगे तो उसी प्रक्रिया में समय गुज़रने के साथ ही उड़ना भी सीख गए होंगे.
कुछ वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि डायनासोर जब अपने लिए भोजन की तलाश में पेड़ों की टहनियों पर छलाँगें लगाते थे, बस उसी प्रक्रिया में धीरे धीरे उड़ना भी सीख गए होंगे.
लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम में डायनासोरों की विशेषज्ञ डॉक्टर एंजेला मिलनर डायनासोरों के उड़ने के विचार को एक क्रांतिकारी खोज मानती हैं.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "इस नए शोध ने इस विचार को ही नया आयाम दिया है कि उड़ने की प्रवृत्ति ही कैसे विकसित हुई."
यह शोध विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित किया जा रहा है. प्रोफेसर डायल के इस शोध पर उनकी एक प्रदर्शनी 'डायनो बर्ड्स' लंदन भी लगी हुई है. |
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