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शुक्रवार, 08 नवंबर, 2002 को 06:43 GMT तक के समाचार थोड़ी सी शराब भी ख़तरनाक
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थोड़ी सी मात्रा में पी गई शराब भी दिमाग पर असर करती है
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नेदरलैंड के वैज्ञानिकों की एक टीम ने पहली बार यह दिखाया है कि बहुत थोड़ी सी शराब पीने से भी ग़लतियाँ पकड़ने और सुधारने की क्षमता पर असर पड़ता है.
विज्ञान पत्रिका 'साइंस' में छपे इस टीम के शोध से पता लगा है कि शराब की जितनी मात्रा पीकर गाड़ी चलाना सुरक्षित समझा जाता है, उससे काफ़ी कम शराब पीने से भी दिमाग पर ऐसा असर होता है.
बीबीसी के निक एडकॉक के अनुसार एमस्टर्डम विश्वविद्यालय में किए गए इस शोध में शामिल स्वयंसेवकों में से कई को संतरे का रस और पेपरमिंट का तेल जैसी चीज़ें भी पिलाकर देखी गईं.
बहुत थोड़ी सी शराब भी गलती न करने की क्षमता पर असर डालती है | | शोधकर्ता | इनमें से कुछ लोगों को दिए गए पेय में वोडका शराब मिली हुई थी, जबकि कुछ के गिलासों में शराब नहीं थी.
दिमाग पर असर
इसके बाद इन सबको तीन आसान से काम करने के लिए दिए गए और उनकी दिमागी तरंगों का निरीक्षण किया गया, ख़ासकर दिमाग के उस भाग का जो किसी भी ग़लती की चेतावनी देता है.
पाया गया कि दिमाग अपने आप यह बताता है कि ग़लती सुधारने की आवश्यकता है.
अधिकतर समय यह अपने आप हो जाता है और व्यक्ति ग़लतियाँ करने से बच जाता है.
लेकिन प्रोफ़ेसर रिचार्ड रिडरिनकोफ़ जिन्होंने इस शोध पर काम किया कहते हैं, "शराब की बहुत सीमित मात्रा भी इस ख़ुदबख़ुद ग़लती न करने की दिमाग की प्रक्रिया पर असर डालती है."
उनका कहना है, "दिमाग की ऐसी तरंग है जिसे हम 'ऊप्स' कहते हैं. यह तरंग तब उठती है जब कोई व्यक्ति ग़लती करता है. जब आदमी ग़लती करने लगता है तो उससे पहले यह तरंग दिमाग में उठती है और फिर ग़लती न करने पर यह तरंग गायब हो जाती है."
उनका कहना है कि थोडी सी मात्रा में भी शराब पीने से इस तरंग का पैदा होना बहुत कम हो जाता है. इस शोध में हर आदमी ने जो शराब पी वो कम से कम दो गिलास वाइन या बियर के बराबर थी.
बहुत से देशों में इससे कहीं ज़्यादा शराब पीकर गाड़ी चलाना सुरक्षित माना जाता है.
प्रोफ़ेसर रिचर्ड रिडरिनकोफ़ का कहना है कि अब इस बात पर फिर से विचार किए जाने की ज़रूरत है कि कितनी शराब पीकर गाड़ी चलाने की इजाज़त होनी चाहिए. |
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