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सोने के कणों से कैंसर का बेहतर इलाज
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अमरीका में शोधकर्ताओं ने सोने के सूक्ष्म कणों की उर्जा से ऐसे तरीक़े का आविष्कार किया है जिससे कैंसर के इलाज में इस्तेमाल
होने वाली दवाईयाँ बेहतर और कारगर तरीक़े से दी जा सकती हैं.
एमआईटी दल ने अपनी पत्रिका एसीएस नैनो में लिखा है कि इस उपाय से शरीर में बीमारी वाली जगह पर दवाईयाँ नियमित समयंतराल पर छोड़ी जा सकती हैं.
ये उपाय उस सिद्धांत पर काम करेगा जिसमें सोने के कण अवरक्त (इनफ़्रारेड) प्रकाश के विभिन्न स्तर पर संपर्क में आने पर पिघल जाएँगे. सही तापमान पर ये पिघल जाते हैं और इनके ज़रिए ले जाई गई दवाई उपयुक्त जगह पर पहुँचाई जाती है. शरीर में सीधे बीमारी वाली जगह पर दवाई पहुँचाने का एक फ़ायदा ये होगा कि दवाई का दुष्प्रभाव शरीर के स्वस्थ ऊतकों पर नहीं पड़ेगा.
पारंपरिक कीमियोथैरिपी से जुड़े दुष्प्रभावों को रोकने के लिए कई प्रयोगों में सूक्ष्म कणों और कई बार तो अतिसूक्ष्म कणों से ट्यूमर वाली जगह पर सीधे दवाई प्रतिस्थापित की जा रही है. ये यंत्र विभिन्न आकृतियों के दो ऐसे सूक्ष्म कणों से बना है जिसमें अलग अलग पिघलने वाले बिन्दु हैं. इससे दवाईयाँ नियंत्रित तरीक़े से सही समयअंतराल पर छोड़ी जा सकती हैं. रिपोर्ट के अग्रणी संलेखक, एंडी विजाया ने कहा, "इंफ़्रारेड किरणों के तरंगदैर्ध्य को नियंत्रित करके हम दवाई छोड़ने का वक्त चुन सकते हैं." यूके कैंसर रिसर्च संस्थान के कैट आर्ने का कहना है, "ये नई तकनीक अच्छी है जिससे शरीर में कई दवाईयाँ सीधे बीमारी वाली जगह पर पहुँचाई जा सकती हैं. लेकिन ये अभी शुरूआती स्तर पर है और अभी इसका इस्तेमाल मरीज़ों पर नहीं किया जा सकता है." |
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