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शनिवार, 03 जनवरी, 2009 को 16:18 GMT तक के समाचार
 
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चुस्ती फुर्ती और एकाग्रता के लिए एकपादासन
 
एकपादासन
एकपादासन से बाज़ू और कलाई की शक्ति बढती है. कमर और पैरों की मांसपेशियों में ताक़त आती है.
योगाभ्यास एक साधना है जिसके लिए एकाग्रता ज़रूरी है और एकाग्रता तभी आएगी जब आप सतत अभ्यास करेंगे. एकपादासन के अभ्यास से शरीर के अंग दृढ होते हैं और नियमित अभ्यास से एकाग्रता बढती है.

शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन के लिए योगाभ्यास ज़रूरी है.

विधि

सीधे खड़े हो जाएं. दोनों पैरों को मिला लें. शरीर के प्रति सजग हो जाएं. दोनों बाजुओं को सिर के ऊपर लेकर आएं. दोनों हाथों की अंगुलियों को मिला लें.

अब साँस भरें, बाज़ू ऊपर खींचे और साँस बाहर निकालें. कमर से आगे की ओर झुकिए. अब बाएं पैर को पीछे की ओर ऊपर उठाएं ताकि बाज़ू, सिर, धड़ और बायां पैर एक सीध में यानि ज़मीन के समान्तर आ जाएं.

पूरे शरीर का भार दाएं पैर पर रखें. दाएं पैर का घुटना मुड़े नहीं वरना संतुलन बिगड़ जाएगा. इस अवस्था में पांच सेकंड तक रूकें. संतुलन बनाएं और सामने की ओर देखें.

अब प्रारंभिक अवस्था में वापस आ जाएं. यह पूरा एक राउंड है. दूसरे पैर से भी एक पादासन का इसी तरह अभ्यास करें. उच्च रक्तचाप से पीड़ित होंने पर एक पादासन का अभ्यास नहीं किया जाना चाहिए.

लाभ

एक पादासन में संतुलन से एकाग्रता बढती है और तंत्रिकाओं में तालमेल बढता है. बाज़ू और कलाई की शक्ति बढती है. कमर और पैरों की मांसपेशियों में ताक़त आती है.

कमर का दर्द और भारीपन दूर होता है. राहत मिलती है और आप स्वयं को हल्का महसूस करते हैं.

पूर्णभुजा शक्ति विकासक

दूसरा अभ्यास है पूर्ण भुजा शक्ति विकासक क्रिया जिससे बाज़ुओं की शक्ति और फेफड़ों की शक्ति बढती है तथा शरीर के सभी अंगों में प्राण शक्ति का संचार होता है.

पूर्णभुजा शक्ति विकासक
इससे प्राण शक्ति का स्तर बढता है और आप दिनभर चुस्त दुरुस्त महसूसू करते हैं.

विधि

सीधे खड़े हो जाएं. पैरों को मिलाकर रखें. बाज़ुओं को सीधे रखें. छाती तनी हुई और कंधे पीछे की ओर खींचकर रखें. शरीर में किसी प्रकार का ढीलापन नहीं होना चाहिए.

इसे करने के लिए दाएं हाथ की मुट्ठी बनाएं. अंगूठा अंदर और अंगुलियाँ बाहर रखें. बाएं हाथ के तलवे को जंघा से सटाकर रखें. साँस भरते हुए दाएं बाज़ू को कंधों के सामने लाएं.

उसके बाद साँस भरे बाज़ू को सिर के ऊपर लाएं. अब साँस छोड़ें और दाईं हथेली को कंधों के पीछे से नीचे लेकर आएं. इस तरह एक चक्र पूरा होगा.

अब दाएं हाथ से लगातार दस बार इसी तरह गोलाकार चलाएं. उसके बाद बाएं हाथ से भी मुट्ठी बनाकर दस बार गोलाकार चलाएं.

अंत में साँस को सामान्य करें. फिर दोनों हाथों की मुट्ठी बनाकर दस बार गोलाकार चलाएं. सामने से पीछे की ओर ले जाएं. साँस की एकाग्रता बनाएं रखें.

विशेष

जिस तरह हाथों को एक दिशा में गोलाकार घुमाते हैं, उसी तरह हाथों को उल्टी दिशा में भी गोलाकार घुमाएं.

साँस के प्रति सजग रहें. एक साँस में एक चक्र पूरा करें. बाज़ू बिल्कुल सीधी रखें. शरीर को तानकर रखें.

लाभ

जिन लोगों को कठिन आसन करने में दिक्कत होती है, वे इस अभ्यास से आसन और प्राणायाम के लाभ एक साथ प्राप्त कर सकते हैं. इसके अभ्यास से बाज़ुओं की माँसपेशियाँ मजबूत बनती हैं और उनमें अपूर्व बल आता है. कंधों की जकड़न दूर होती है.

खुलकर गहरी साँस लेने और छोड़ने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है. इससे प्राण शक्ति का स्तर बढता है और आप दिनभर चुस्त दुरुस्त महसूसू करते हैं.

 
 
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