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ग्रेनेड कैमरा हो रहा तैयार
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युद्धभूमि में ब्रितानी सैनिकों की मदद के लिए अब अब आई-बॉल की मदद ली जाएगी.
आई-बॉल एक वायरलेस गेंद की तरह है जिसे लड़ाई के मैदान में हथगोले की तरह फेंका जा सकता है या फिर ग्रेनेड लॉन्चर से भी. इसी वजह से कैमरा ग्रेनेड भी कहा जा रहा है. इसे इतना मज़बूत बनाया गया है कि यह काफ़ी तेज़ झटके सह सकता है, इसके भीतर लगे कैमरे 360 डिग्री यानी चारों तरफ़ की तस्वीरें तत्काल भेज सकते हैं. लड़ाई के मैदान में दुश्मन के किसी मोर्चे पर कितने सैनिक और कैसे हथियार हैं या मोर्चे की संरचना क्या है, ऐसी जानकारियाँ हासिल करने में इस कैमरा ग्रेनेड से काफ़ी मदद मिल सकती है.
सैनिकों को ख़तरे में डाले बिना दुश्मन के बारे में काफ़ी प्रामाणिक जानकारी मिल सकेगी. ग्रेनेड कैमरा रियल टाइम में अपने चारों तरफ़ की तस्वीर तुरंत भेज सकता है, विशेष तौर पर तैयार किए गए वायरलेस डेटा प्रोसेसर की मदद से सैनिक ग्रेनेड कैमरा की तस्वीरें बिना किसी समस्या के देख सकते हैं. ब्रितानी रक्षा मंत्रालय की ओर से आयोजित एक प्रतियोगिता के तहत यह आइडिया आया था जिसे मंत्रालय ने आगे बढ़ाया है. स्कॉटलैंड स्थित एक कंपनी ड्रीमपैक्ट इसे बना रही है, कंपनी के प्रमुख पॉल थॉमसन का कहना है कि अभी कैमरा ग्रेनेड अपनी शुरूआती अवस्था में है लेकिन उन्हें पूरी उम्मीद है कि रणभूमि में कारगर सिद्ध होगा. उन्होंने कहा, "हमने कई शुरूआती वैज्ञानिकों चुनौतियों का हल निकाल लिया है, हमें पूरी उम्मीद है कि सैनकों को इससे लड़ाई के मैदान में मदद मिलेगी." रक्षा मंत्रालय के निदेशक एंड्रयू बेयर्ड ने भी इस नई वैज्ञानिक उपलब्धि की सराहना की है. उन्होंने कहा, "आई-बॉल की टेक्नॉलॉजी बहुत ही बेहतरीन है और उसमें इतना दम है कि भविष्य के रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है." आई-बॉल को सैनिकों के हाथ में आने में भी कई साल लग सकते हैं और इसकी लागत के बारे में नहीं बताया गया है. |
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