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मंगल पर 'बर्फ़' के निशान
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अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी - नासा का मानना है कि उसके अंतरिक्ष यान फ़ीनिक्स ने मंगल ग्रह पर बर्फ़ होने का ठोस सबूत सामने लाकर
रख दिया है.
यान को मंगल पर एक गड्ढ़े की सतह खोदने पर कोई चमकीली चीज़ मिली जो मंगल ग्रह के हिसाब से चार दिन बाद ग़ायब हो गई. नासा का अनुमान है कि चमकीली चीज़ बर्फ़ थी जो चार दिनों के दरम्यान भाप बनकर उड़ गई. एक दूसरे गड्ढ़े को कुरेदने के बाद यान को उसी गहराई पर कुछ ठोस सतह मिली. इससे इस बात को बल मिलता है कि मंगल ग्रह की सतह के नीचे स्थायी रूप से जमा हुआ पानी है. बसने लायक सबूत की तलाश टस्कन के एरिज़ोना विश्वविद्यालय में आ रही सूचनाओं का अध्ययन कर रहे फ़ीनिक्स यान के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. पीटर स्मिथ कहते हैं, "इसे बर्फ़ ही होना चाहिए."
डॉक्टर स्मिथ कहते हैं, "कुछ दिन बीतने के बाद ही ये छोटे-छोटे टुकड़े पूरी तरह से ग़ायब हो जा रहे हैं. यह इस बात का ठोस सबूत है कि ये बर्फ हैं." उनका कहना है, "कुछ सवाल थे कि क्या यह चमकीली चीज़ नमक हो सकती है लेकिन नमक ऐसा नहीं कर सकता." फ़ीनिक्स ने मंगल पर उतरने के बीसवें दिन एक गड्ढ़े को खोदकर बर्फ़ के इन टुकड़ों को खोजा और उनकी तस्वीरें ली. चार दिन बाद यान ने दोबारा उसी जगह की तस्वीर ली लेकिन तब तक कुछ टुकड़ें ग़ायब हो चुके थे. इससे पहले बर्फ़ के मिलने की उम्मीदें कम होती जा रही थीं क्योंकि मंगल की सतह पर से ली गई मिट्टी में पानी का कोई नामो-निशान तक नहीं मिला था. मंगल पर बर्फ़ होने के सबूत इससे पहले भी जुटाए गए थे. लेकिन फ़ीनिक्स के इस अभियान का असल मक़सद उन साक्ष्यों का पता लगाना है जिससे इस ग्रह के ध्रुवीय इलाक़ों में बसने के विचारों को ताक़त मिले. |
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